भाजपा सरकार किसानों के साथ भेदभाव बंद करे, गन्ने का लाभकारी मूल्य घोषित करने की मांग
पंचकूला, 31 अक्टूबर। इंडियन नेशनल लोकदल के प्रदेश कोषाध्यक्ष एवं पंचकूला शहरी जिलाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने हरियाणा सरकार द्वारा गन्ने के मूल्य में मात्र 15 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी किए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार गन्ना किसानों की मेहनत और उनकी आर्थिक परेशानियों की अनदेखी कर रही है। एक ओर बाजार में चीनी के दाम 60 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गन्ना उत्पादक किसानों को केवल 15 पैसे प्रति किलो की राहत दी जा रही है।
मनोज अग्रवाल ने कहा कि बाजार के आंकड़े सरकार की किसान नीति पर सवाल खड़े करते हैं। चीनी के मिल भाव में महज छह दिनों के भीतर उत्तर प्रदेश में करीब 13 प्रतिशत और महाराष्ट्र में लगभग 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं अक्टूबर में देश के खुदरा बाजार में चीनी का औसत भाव 56 रुपये प्रति किलो से ऊपर पहुंच गया। इसके बावजूद गन्ना किसानों को बढ़ती कीमतों का उचित लाभ नहीं मिल रहा।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब बाजार में चीनी महंगी हो रही है तो उसका फायदा गन्ना उत्पादक किसानों तक क्यों नहीं पहुंच रहा? चीनी उद्योग की पूरी अर्थव्यवस्था किसानों की मेहनत पर निर्भर है, लेकिन किसानों को उनकी बढ़ती लागत के अनुरूप मूल्य देने के मामले में सरकार पीछे क्यों हट रही है?
उन्होंने कहा कि डीजल, खाद, बीज, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी और कृषि मशीनरी की लागत लगातार बढ़ रही है। गन्ने की फसल तैयार करने में किसान को कई महीने तक मेहनत और पूंजी लगानी पड़ती है। ऐसे में 15 रुपये प्रति क्विंटल की मामूली बढ़ोतरी से किसानों की बढ़ी हुई लागत की भरपाई भी संभव नहीं है।
मनोज अग्रवाल ने कहा कि हरियाणा में चौटाला और हुड्डा सरकारों के कार्यकाल के दौरान गन्ने के मूल्य में हुई बढ़ोतरी के आंकड़ों की भी समीक्षा होनी चाहिए। हुड्डा सरकार के अंतिम कार्यकाल में गन्ने का भाव 310 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया था। आज महंगाई और खेती की लागत में भारी वृद्धि के बावजूद किसानों को अपेक्षित राहत नहीं मिल रही है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार किसानों की आमदनी दोगुनी करने के वादे करती रही है, लेकिन खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और किसानों की आमदनी उस अनुपात में नहीं बढ़ रही। सरकार को चीनी मिलों और उपभोक्ताओं के साथ-सा
