आज भारतीय सांस्कृतिक ज्ञान संगठन, चंडीगढ़ के संस्थापक एवं प्रसिद्ध समाजसेवी अनूप सरीन द्वारा सनातन धर्म मंदिर सेक्टर 45 चंडीगढ़ में श्रद्धालुओं के लिए मिट्टी के मटके प्रदान किए गए। इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में राजेश गोयल का विशेष योगदान रहा।
कार्यक्रम का उद्देश्य भीषण गर्मी में लोगों को ठंडा एवं शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना और पारंपरिक व स्वास्थ्यवर्धक जीवनशैली के प्रति जागरूक करना रहा।
मिट्टी के घड़े या मटके का पानी पीना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है, विशेषकर गर्मियों में। इसके प्रमुख फायदे इस प्रकार हैं:
- प्राकृतिक शीतलन: मटके के सूक्ष्म छिद्रों से वाष्पीकरण के कारण पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है, जो गले के लिए सुरक्षित है।
- पाचन में सुधार: आयुर्वेद के अनुसार यह मेटाबॉलिज्म बढ़ाकर पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है।
- पीएच संतुलन: मिट्टी के क्षारीय गुण पानी के अम्लीय गुणों को संतुलित कर एसिडिटी कम करते हैं।
- गले के लिए सौम्य: यह अत्यधिक ठंडा नहीं होता, जिससे खांसी-जुकाम का खतरा कम होता है।
- प्राकृतिक शोधक: मिट्टी अशुद्धियों को सोखकर पानी को शुद्ध बनाती है।
- लू से बचाव: नियमित सेवन से गर्मी और लू से सुरक्षा मिलती है।
- खनिजों से भरपूर: मिट्टी के प्राकृतिक खनिज शरीर को पोषण देते हैं।
- विषाक्त पदार्थों से मुक्त: प्लास्टिक की तुलना में इसमें कोई हानिकारक रसायन नहीं होते।
सावधानी: मटके को स्वच्छ रखना चाहिए और हर 3-4 दिन में पानी अवश्य बदलना चाहिए।
इस पहल के माध्यम से जहां एक ओर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया, वहीं कुम्हार समुदाय के पुश्तैनी व्यवसाय को भी बढ़ावा देने का संदेश दिया गया, जो पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस अवसर पर संगठन से जुड़े कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें मुकेश शास्त्री, एल.डी. शर्मा, हरदयाल, आर.एम. शर्मा, राजिन्दर, गुरदेव, सतीश विज, भगत सिंह, अमन टिवाना और शीशपाल चौहान सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।
