*चण्डीगढ़।*
भारतीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित अग्रणी सांस्कृतिक संस्था “प्राचीन कला केन्द्र” द्वारा “आँगन से कैनवास तक – सृजन • संवेदना • सौन्दर्य” शीर्षक से एक विशेष त्रिदिवसीय चित्र प्रदर्शनी का आयोजन *7 से 9 अगस्त, 2026* तक *पी.के.के. आर्ट गैलरी, प्राचीन कला केन्द्र, सेक्टर-35 बी, चण्डीगढ़* में किया जा रहा है। प्रदर्शनी प्रतिदिन प्रातः *11:00 बजे से सायं 7:00 बजे* तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी। प्रदर्शनी का उद्घाटन *7 अगस्त, 2026 को दोपहर 12:00 बजे* प्रख्यात चित्रकार *श्री सिकंदर सिंह जी* मुख्य अतिथि के रूप ने किया। इस अवसर पर केंद्र की रजिस्ट्रार डॉ शोभा कौसर ने मुख्या अतिथि को पुष्प एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया । इस अवसर पर केंद्र के सचिव श्री सजल कौसर भी उपस्थित थे।
यह प्रदर्शनी उन प्रतिभाशाली महिलाओं की सृजनात्मक अभिव्यक्तियों को समर्पित है जिन्होंने गृहस्थ जीवन की अनेक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए भी अपने भीतर बसे कलाकार को जीवंत रखा। परिवार और समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वाह करते हुए उन्होंने अपनी कला-साधना को निरन्तर आगे बढ़ाया और यह सिद्ध किया कि सच्ची प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती।
प्रदर्शनी में चार विशिष्ट कलाकारों—*मुक्ता सूद, स्नेहलता जेना, कादम्बरी वर्धन तथा सुरेखा सरदाना*—की विविध शैली की कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गयी , जिनमें भारतीय संस्कृति, लोक परम्पराओं, प्रकृति, आध्यात्मिकता और जीवन के विविध रंगों का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
*मुक्ता सूद* एक स्व-शिक्षित मधुबनी कलाकार हैं, जिनकी कला मिथिला की समृद्ध लोक परम्परा से प्रेरित है। उनकी चित्रकृतियों में प्रकृति, पौराणिक कथाएँ तथा भारतीय सांस्कृतिक जीवन अत्यंत सूक्ष्म रेखांकन, प्रतीकों और पारंपरिक अलंकरणों के माध्यम से जीवंत हो उठते हैं।
*स्नेहलता जेना* एक कुशल चित्रकला शिक्षिका, गृहिणी तथा प्राचीन कला केन्द्र से *चित्र भास्कर (विशिष्ट श्रेणी)* उपाधि प्राप्त कलाकार हैं। प्रकृति और दैनिक जीवन से प्रेरित उनकी चित्रकृतियाँ संवेदनशीलता, सौन्दर्यबोध और सृजनात्मक समर्पण की अनूठी मिसाल हैं तथा उनकी कला-यात्रा अनेक नवोदित कलाकारों के लिए प्रेरणास्रोत है।
*कादम्बरी वर्धन* एक स्वतंत्र कलाकार हैं तथा उन्हें *’बेस्ट वूमेन अचीवर अवॉर्ड इन कला एंड संस्कृति’* से सम्मानित किया जा चुका है। भारतीय सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत से प्रेरित उनकी चित्रकृतियाँ भारतीय परम्परा और आधुनिक कलाभिव्यक्ति का सुंदर संगम प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने अनेक प्रतिष्ठित कार्यशालाओं एवं कला प्रदर्शनियों में अपनी रचनात्मक उपस्थिति दर्ज कराई है।
*सुरेखा सरदाना*, जो प्राचीन कला केन्द्र, पंजाब विश्वविद्यालय तथा गवर्नमेंट कॉलेज फॉर वूमेन, चण्डीगढ़ की पूर्व छात्रा रही हैं, पिछले पाँच दशकों से अधिक समय से चित्रकला के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ललित एवं प्रदर्शन कलाओं में अनेक सम्मानों से अलंकृत सुरेखा जी अपने 75वें वर्ष में अपने मातृ संस्थान प्राचीन कला केन्द्र की आर्ट गैलरी में अपनी प्रथम सार्वजनिक चित्र प्रदर्शनी प्रस्तुत कर रही हैं, जो उनके दीर्घ एवं समर्पित कला-सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
यह प्रदर्शनी उन अनगिनत प्रतिभाशाली महिलाओं को एक सशक्त मंच प्रदान करने का प्रयास है जिनकी रचनात्मक क्षमता प्रायः घर की चारदीवारी तक ही सीमित रह जाती है। प्राचीन कला केन्द्र का उद्देश्य न केवल उनकी कला को समाज के समक्ष लाना है, बल्कि यह संदेश भी देना है कि यदि प्रतिभा को उचित अवसर और मंच मिले तो वह समाज को नई दिशा और नई प्रेरणा प्रदान कर सकती है।
प्रदर्शनी में प्रदर्शित प्रत्येक चित्र केवल रंगों और रेखाओं का संयोजन नहीं, बल्कि संवेदनाओं, अनुभवों, संस्कृति और जीवन-दर्शन का सशक्त प्रतिबिंब है। यह आयोजन कला प्रेमियों, विद्यार्थियों, शिक्षाविदों तथा आम जनमानस के लिए एक प्रेरणादायी अनुभव सिद्ध होगा।
इस अवसर पर कलाकारों को उत्तरीय एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।
केंद्र के सचिव श्री सजल कौसर ने समस्त कला प्रेमियों, कलाकारों, विद्यार्थियों, मीडिया प्रतिनिधियों एवं आम नागरिकों से आग्रह आग्रह किया कि वे इस विशेष प्रदर्शनी में पधारकर इन प्रतिभाशाली गृहिणी कलाकारों की सृजनात्मक यात्रा के साक्षी बनें तथा उनकी कला का उत्साहवर्धन करें।**
