भागवत कथा मनुष्य को केवल ईश्वर से नहीं, बल्कि समाज और संस्कारों से भी जोड़ती है : कथा व्यास श्री विजय शास्त्री जी

चंडीगढ़, 4 अक्टूबर 2026: सेक्टर-45 स्थित सब्जी मंडी ग्राउंड में श्री राधावल्लभ भागवत सेवा ट्रस्ट, राधावल्लभ महिला मंडल एवं आरबी युवा शक्ति फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 15वीं श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस श्रद्धालुओं ने भक्ति, ज्ञान और अध्यात्म की पावन गंगा में भावपूर्वक डुबकी लगाई। कथा के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय रहा और श्रद्धालु कथा प्रसंगों को श्रद्धा एवं एकाग्रता के साथ सुनते नजर आए।

कथा व्यास श्रद्धेय श्री विजय शास्त्री जी ने श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों का आध्यात्मिक भाव से वर्णन करते हुए कहा कि भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मनुष्य को जीवन की सही दिशा दिखाने वाली आध्यात्मिक चेतना है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य कथा के संदेश को अपने जीवन में उतारता है, तो उसके भीतर प्रेम, करुणा, संयम, सेवा और परस्पर सम्मान की भावना विकसित होती है।

उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज को जोड़ने की सबसे बड़ी आवश्यकता है और श्रीमद्भागवत कथा इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कथा हमें सिखाती है कि मनुष्य की वास्तविक पहचान उसके पद, धन अथवा बाहरी वैभव से नहीं, बल्कि उसके संस्कार, व्यवहार और सेवा-भाव से होती है।

कथाव्यास श्री विजय शास्त्री जी ने कथा के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को समझाया कि परिवार में प्रेम और बड़ों का सम्मान, युवाओं में संस्कार तथा समाज में परस्पर सहयोग ही एक मजबूत और सुंदर समाज की नींव है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में धर्म को केवल पूजा तक सीमित न रखकर सेवा, सद्भाव और मानवता के रूप में अपनाए, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन स्वतः आने लगेगा।

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत का संदेश केवल व्यक्तिगत आध्यात्मिक उत्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को परिवार, समाज और मानवता के प्रति अपने दायित्वों का भी बोध कराता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को कथा के संदेश को सुनने के साथ-साथ उसे अपने व्यवहार और जीवन में भी उतारने का प्रयास करना चाहिए।

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