डॉ. विश्वास चितले, फेलो, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू), ने कहा,”भारत में अत्यधिक गर्मी अब केवल दिन के समय मौजूद रहने वाला खतरा भर नहीं रह गई है। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) के शोध बताते हैं कि गर्म दिनों की तुलना में बहुत अधिक गर्मी वाली रातों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इससे इंसानी शरीर को रात में भी दिन की तपिस से राहत नहीं मिल पाती है, जो सेहत से संबंधित खतरों को बढ़ा देता है। चूंकि भारत की 75 प्रतिशत से अधिक आबादी गर्मी के उच्च जोखिम वाले जिलों में रहती है, इसलिए हमें आपातकालीन प्रतिक्रियाओं से आगे बढ़कर दीर्घकालिक रूप से व्यवस्थागत लचीलापन (structural resilience) लाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। हीट एक्शन प्लान (एचएपी) को मजबूत बनाने के लिए जोखिम-आधारित नियोजन को अपनाना जरूरी है, जिसमें बढ़ती आर्द्रता और शहरी हीट आइलैंड जैसे स्थानीय कारकों को ध्यान में रखा जाए। बढ़ती गर्मी के प्रति सर्वाधिक सुभेद्य समुदायों और खुले में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा के लिए, तत्काल ‘कूल रूफ’, नेट-जीरो कूलिंग शेल्टर और पैरामीट्रिक बीमा जैसे समाधानों को मुख्यधारा में लाने की जरूरत है। जलवायु संबंधी आंकड़ों और शहर-स्तरीय बुनियादी ढांचे के एकीकरण करके ही हम इस अदृश्य आपदा का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने और जनस्वास्थ्य व आर्थिक उत्पादकता की सुरक्षा करने में सक्षम हो पाएंगे।”
रातों की बढ़ती गर्मी बना रही नया खतरा, दीर्घकालिक समाधान जरूरी: डॉ. विश्वास चितले
