पंचकुला में ज्योतिष ज्ञान संस्था का भव्य मेगा अवॉर्ड फंक्शन सम्पन्न

  • ज्योतिष और आध्यात्मिक विद्याओं से भारत के विश्वगुरु बनने पर हुआ सार्थक मंथन

पंचकुला:
पंचकुला स्थित एक होटल में ज्योतिष ज्ञान संस्था (अंकिता राजीव शर्मा) द्वारा आईबीएसईए के सहयोग से भव्य मेगा अवॉर्ड फंक्शन का आयोजन किया गया। इस गरिमामय कार्यक्रम में देशभर से आए लगभग 100 सनातनी विद्वानों, साधकों और आध्यात्मिक चिंतकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान इस विषय पर गहन और सार्थक संवाद हुआ कि किस प्रकार ज्योतिष एवं विविध आध्यात्मिक विद्याओं के माध्यम से भारत पुनः विश्व गुरु बनने की दिशा में अग्रसर हो सकता है।

मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में अंकिता राजीव शर्मा ने भारतीय संस्कृति के मूल दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “अहं ब्रह्मास्मि” का अर्थ यह नहीं कि “मैं श्रेष्ठ हूँ”, बल्कि यह कि “मैं भी उसी परम चेतना का अंश हूँ।” उन्होंने कहा कि “मैं श्रेष्ठ हूँ” आत्मविश्वास है, लेकिन “मैं ही श्रेष्ठ हूँ” अहंकार है। भारत की परंपरा सदैव जोड़ने वाली रही है, तोड़ने वाली नहीं। हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम के सिद्धांत पर आधारित है, जहाँ पूरी दुनिया को एक परिवार माना गया है।

उन्होंने कहा कि भारत में गाय को माता कहा जाता है, वृक्षों की पूजा की जाती है और कण-कण में ईश्वर का वास माना जाता है। हमारे प्रत्येक पर्व के पीछे एक गहन आध्यात्मिक और सामाजिक उद्देश्य छिपा होता है। अपने वक्तव्य में उन्होंने 2025 प्रयागराज महाकुंभ का उल्लेख करते हुए बताया कि 45 दिनों में लगभग 66 करोड़ श्रद्धालुओं की सहभागिता के साथ यह विश्व का सबसे बड़ा मानव समागम बना। यह केवल आस्था का नहीं, बल्कि भारत की चेतना और सांस्कृतिक शक्ति का उत्सव था।

अंकिता ने कहा कि आज आध्यात्मिकता केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रही है। मोबाइल ऐप्स, एआई, डिजिटल प्लेटफॉर्म और टेक्नोलॉजी के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान तेजी से युवाओं तक पहुँच रहा है। जेन-ज़ी की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में फेथ-टेक इंडस्ट्री का वैश्विक बाजार आकार लगभग 65 बिलियन डॉलर (करीब 5 लाख करोड़ रुपये) है। भारत में 900 से अधिक स्पिरिचुअल टेक स्टार्टअप्स सक्रिय हैं और कोविड के बाद डिजिटल आध्यात्मिक सेवाओं की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

उन्होंने यह महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाया कि क्या आध्यात्म केवल व्यवसाय बनकर रह गया है। इसका उत्तर देते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि आध्यात्म केवल बिजनेस नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। इस भाव को व्यक्त करते हुए उन्होंने श्लोक उद्धृत किया—
“अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥”

अपने संबोधन के समापन पर उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रेरणादायी पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि एक जीवंत राष्ट्रपुरुष है। उन्होंने यह भी साझा किया कि उनका संगठन 21वीं सदी के विकसित भारत के निर्माण हेतु 21 विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है, जिनमें होलिस्टिक हेल्थकेयर एक प्रमुख क्षेत्र है। साथ ही, आईबीएससी के “व्यापार बढ़ाओ एलायंस” के माध्यम से आध्यात्मिक हीलर्स को तकनीक से जोड़कर उनके कार्य विस्तार में सहयोग देने की जानकारी भी दी।

कार्यक्रम के अंत में आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी साथियों का हृदय से आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया गया।

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