33 government portals in Chandigarh remain unsecured, High Court gives 6 months to improve cyber security

चंडीगढ़। ( ):- पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने चंडीगढ़ प्रशासन की सरकारी वेबसाइटों एवं डिजिटल पोर्टलों की साइबर सुरक्षा से संबंधित जनहित याचिका का निपटारा करते हुए प्रशासन को शेष असुरक्षित पोर्टलों को सुरक्षित बनाने के लिए छह माह की समय-सीमा प्रदान की है। न्यायालय ने स्पष्ट अपेक्षा जताई कि केंद्र सरकार द्वारा जारी साइबर सुरक्षा एवं सरकारी वेबसाइटों संबंधी सभी दिशा-निर्देशों का समयबद्ध पालन सुनिश्चित किया जाए।
23 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ प्रशासन के सूचना प्रौद्योगिकी निदेशक द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत शपथ-पत्र एवं स्थिति रिपोर्ट में स्वीकार किया गया कि प्रशासन की कुल 127 सरकारी वेबसाइटों एवं पोर्टलों में से 33 अभी भी सुरक्षित एन्क्रिप्शन (HTTPS) से रहित हैं तथा पुराने डिजिटल ढांचे पर संचालित हो रहे हैं। प्रशासन ने बताया कि राज्य डेटा सेंटर के व्यापक उन्नयन कार्य के कारण यह स्थिति बनी हुई है और शेष सभी वेबसाइटों एवं पोर्टलों को अगले 5 से 6 माह के भीतर पूर्ण रूप से सुरक्षित बना दिया जाएगा।
खंडपीठ ने प्रशासन की समय-सीमा को रिकॉर्ड पर लेते हुए अपेक्षा व्यक्त की कि केंद्र सरकार द्वारा सरकारी वेबसाइटों के लिए जारी दिशा-निर्देशों का पूर्ण अनुपालन किया जाएगा।
डिजिटल गोपनीयता और नागरिक अधिकारों का उठाया गया मुद्दा
यह जनहित याचिका अधिवक्ता राजा विक्रांत शर्मा, जो साइबर एवं डिजिटल प्राइवेसी मामलों के अधिवक्ता हैं, द्वारा स्वयं दायर और प्रस्तुत की गई। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 एवं 38 का हवाला देते हुए कहा गया कि असुरक्षित सरकारी पोर्टलों का संचालन नागरिकों के निजता के अधिकार, सुरक्षित डिजिटल सेवाओं तक पहुंच तथा शिक्षा के अधिकार को प्रभावित करता है।
याचिका में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 तथा डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के प्रावधानों का भी उल्लेख किया गया। इसमें आरोप लगाया गया कि छात्रों के केंद्रीकृत प्रवेश पोर्टल सहित कई सरकारी पोर्टलों पर संवेदनशील नागरिक जानकारी बिना मानक साइबर सुरक्षा व्यवस्था के संसाधित की जा रही थी।
उच्च शिक्षा प्रवेश पोर्टल पर उठाए गए सवाल
याचिका में विशेष रूप से उच्च शिक्षा विभाग के केंद्रीकृत प्रवेश पोर्टल का उल्लेख किया गया, जिस पर छात्रों की आधार संबंधी जानकारी, अंकतालिकाएं, प्रमाण-पत्र, मोबाइल नंबर तथा अन्य संवेदनशील व्यक्तिगत सूचनाएं अपलोड की जाती हैं। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि यह पोर्टल लंबे समय तक पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के बिना संचालित होता रहा, जिससे विद्यार्थियों के डेटा की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न हुईं।
याचिका में यह भी कहा गया कि इस विषय पर प्रशासन को कई बार लिखित अभ्यावेदन भेजे गए, लेकिन आवश्यक कार्रवाई नहीं होने पर सूचना के अधिकार (आरटीआई) के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई।
GIGW 3.0 के अनुरूप होंगे सरकारी पोर्टल
प्रशासन ने न्यायालय को बताया कि राज्य डेटा सेंटर का आधुनिकीकरण किया जा रहा है तथा सभी सरकारी वेबसाइटों और पोर्टलों को चरणबद्ध तरीके से सुरक्षित HTTPS प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित किया जाएगा। इस प्रक्रिया के पूरा होने पर चंडीगढ़ की सरकारी डिजिटल सेवाओं को भारत सरकार की GIGW 3.0 (गाइडलाइंस फॉर इंडियन गवर्नमेंट वेबसाइट्स) के अनुरूप सुरक्षित, सुलभ एवं समावेशी बनाने का लक्ष्य है।
याचिकाकर्ता अधिवक्ता राजा विक्रांत शर्मा ने कहा कि वे न्यायालय द्वारा निर्धारित समय-सीमा के अनुपालन पर लगातार नजर रखेंगे। यदि निर्धारित अवधि में शेष पोर्टलों को सुरक्षित नहीं किया गया तो न्यायालय के समक्ष आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
क्या हैं GIGW 3.0 दिशा-निर्देश?
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा तैयार GIGW 3.0 दिशा-निर्देश सरकारी वेबसाइटों के निर्माण एवं संचालन के मानक निर्धारित करते हैं। इनके अंतर्गत वेबसाइटों पर अनिवार्य साइबर सुरक्षा, सुरक्षित एन्क्रिप्शन (HTTPS), दिव्यांगजन के लिए सुगम पहुंच (Accessibility), मोबाइल-अनुकूल डिज़ाइन तथा नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है। इनका उद्देश्य सरकारी डिजिटल सेवाओं को सुरक्षित, पारदर्शी, समावेशी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाना है।
आईटी ढांचे को मजबूत करने के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू
इस जनहित याचिका के बाद चंडीगढ़ प्रशासन के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एसपीआईसी (SPIC) के माध्यम से आईटी ढांचे को मजबूत करने के लिए विभिन्न तकनीकी एवं प्रशासनिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया भी प्रारंभ की गई है। इनमें जूनियर प्रोग्रामर, नेटवर्क इंजीनियर, डेटा प्रोसेसिंग एसोसिएट, सेक्शन ऑफिसर, सीनियर असिस्टेंट, क्लर्क-कम-स्टेनोग्राफर तथा मल्टी टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) सहित अनेक पद शामिल हैं। इन नियुक्तियों का उद्देश्य प्रशासन की डिजिटल क्षमता बढ़ाना तथा साइबर सुरक्षा संबंधी सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू करना है।

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