200 करोड़ से अधिक के निगम भूमि घोटाले ने पंचकूला प्रशासन में फैले भ्रष्टाचार की पोल खोल दी : मनोज अग्रवाल

दोषियों को बचाने का कोई प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, उच्च स्तरीय जांच कर सच्चाई जनता के सामने लाई जाए
पंचकूला, 8 जून।
इंडियन नेशनल लोकदल के पंचकूला जिलाध्यक्ष शहरी मनोज अग्रवाल ने पंचकूला में सामने आए 200 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की सरकारी भूमि से जुड़े घोटाले को प्रदेश के सबसे गंभीर भूमि घोटालों में से एक बताते हुए कहा कि अभी तक तो 160 करोड रूपए के कोटक महेंद्रा बैंक घोटाले की जांच पूरी नहीं हुई, अब इस मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था और भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन की पूरी पोल खोलकर रख दी है।
मनोज अग्रवाल ने कहा कि करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन यदि रिकॉर्ड में हेराफेरी, मिलीभगत अथवा भ्रष्टाचार के माध्यम से निजी हाथों में पहुंच जाती है तो यह केवल एक वित्तीय अनियमितता नहीं बल्कि जनता के अधिकारों और सरकारी व्यवस्था पर सीधा हमला है। इतने बड़े स्तर पर हुए कथित घोटाले के पीछे प्रभावशाली लोगों, अधिकारियों और भू-माफियाओं की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में सत्तारूढ दल के नेताओं द्वारा लगातार भूमि घोटालों और अवैध कब्जों की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भ्रष्ट तत्वों के हौसले बुलंद हैं। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो जनता का सरकारी संस्थाओं पर विश्वास कमजोर होगा। उल्लेखनीय है कि तत्कालीन उपायुक्त सुशील सारवान भाजपा की मुलाना से पूर्व विधायक संतोष सारवान के पुत्र हैं।
मनोज अग्रवाल ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी अथवा उच्च स्तरीय विशेष जांच दल से करवाई जाए। मामले में शामिल सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, बिचौलियों और लाभार्थियों की भूमिका की जांच कर उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएं। साथ ही घोटाले से जुड़ी पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि जनता को सच्चाई का पता चल सके। भूमि को वापस निगम के अधिकार में लिया जाए।
मनोज अग्रवाल ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सरकारी भूमि की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार विभाग क्या कर रहे थे और इतनी बड़ी अनियमितता आखिर किन परिस्थितियों में संभव हुई। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार हुआ है तो दोषियों को किसी भी कीमत पर बचाया नहीं जाना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं करवाई गई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो इंडियन नेशनल लोकदल जनता के साथ मिलकर आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होगी। जनता की एक-एक इंच सरकारी जमीन की रक्षा के लिए पार्टी सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी।

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