संस्कृत के आदि रचयिता हैं भगवान वाल्मीकि: संत गोपाल मणि

  • भगवान वाल्मीकि ने रामायण देकर किया मानवता का कल्याण: संत गोपाल मणि

चंडीगढ़ ( ): महर्षि वाल्मीकि शक्ति पीठ, सेक्टर 24 सी में आज गौ गंगा कृपाकांक्षी, पूज्य संत श्री गोपाल मणि जी महाराज का शुभ आगमन हुआ। शक्ति पीठ पहुंचने पर पीठाधीश्वर श्री नवीन सरहदी जी महाराज एवं संस्था के सभी पदाधिकारियों ने महाराज श्री का भव्य और भावपूर्ण स्वागत किया।कार्यक्रम की शुरुआत में महाराज श्री ने भगवान वाल्मीकि जी का विधि-विधान से पूजन किया और वहां उपस्थित भारी संख्या में भक्तजनों को आशीर्वाद दिया। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पूज्य संत गोपाल मणि जी महाराज ने महर्षि वाल्मीकि जी के पावन जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “भगवान वाल्मीकि जी संस्कृत के आदि रचयिता हैं। उन्होंने देववाणी संस्कृत भाषा जगत को दी और रामायण जैसा महान ग्रंथ देकर मानवता का कल्याण किया, जो आज भी हमारा मार्गदर्शन करता है।”महाराज श्री ने सभी भक्तों से आह्वान किया कि वे महर्षि वाल्मीकि जी द्वारा रचित रामायण का नियमित पाठ करें और अपने जीवन को धार्मिक व सदाचारी बनाएं। इसके साथ ही उन्होंने समाज की सुख-समृद्धि के लिए गौ और गंगा की रक्षा करने का दृढ़ संकल्प लेने की बात भी कही।इस पावन अवसर पर महर्षि वाल्मीकि शक्ति पीठ के सभी मुख्य पदाधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे, जिनमें मन्दिर के अध्यक्ष हाकम सरहदी, सहित अजय, गिरिवर शर्मा, आशीष शास्त्री, साहिल शास्त्री, साहिल शर्मा, रोहित शर्मा, बबिता और करण शामिल थे। सभी ने महाराज श्री का आशीर्वाद लिया और गौ-गंगा रक्षा के संकल्प को दोहराया।

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