ग्यारह साल में भारतीय शेयर बाज़ार में आया विदेशी निवेश हुआ शून्य!

  • नौ वर्षों में विदेशी निवेशकों ने लगाए 63.5 अरब डॉलर, अगले दो वर्षों में निकाल लिए 63.6 अरब डॉलर!
  • विदेशी निवेशक पैसा समेटकर लौट रहे हैं, और छोटे भारतीय निवेशक बाज़ार संभाल रहे हैं — क्या यही है आत्मनिर्भर भारत का नया मॉडल? — प्रेम गर्ग

चंडीगढ़, 19 अक्टूबर 2026।

भारतीय शेयर बाज़ार में विदेशी निवेश को लेकर सामने आए ताज़ा आंकड़े देश की आर्थिक नीतियों और विदेशी निवेशकों के विश्वास पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

NSDL के आंकड़ों पर आधारित प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2015 से अक्टूबर 2024 तक लगभग नौ वर्षों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाज़ार में 63.5 अरब डॉलर (लगभग 6 लाख करोड़ रुपये) का शुद्ध निवेश किया। लेकिन अक्टूबर 2024 से अक्टूबर 2026 के बीच मात्र दो वर्षों में विदेशी निवेशकों ने 63.6 अरब डॉलर की शुद्ध निकासी कर ली।

इस प्रकार पिछले ग्यारह वर्षों के दौरान भारतीय शेयर बाज़ार में विदेशी निवेशकों का शुद्ध निवेश शून्य हो गया है। वास्तव में यह आंकड़ा करीब 11 करोड़ डॉलर के नेगेटिव स्तर पर पहुंच गया है।

इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रेम गर्ग ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी की—

“वाह रे आर्थिक विकास! विदेशी निवेशकों को भारत लाने में नौ साल लगे और उन्हें विदा करने में मात्र दो साल! अब सही मायनों में हम आत्मनिर्भर भारत की ओर चल रहे हैं।”

प्रेम गर्ग ने कहा कि सरकार लगातार भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक और विदेशी निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बताती रही है। लेकिन सवाल यह है कि यदि भारत की आर्थिक संभावनाएं इतनी उज्ज्वल हैं, तो विदेशी निवेशक इतनी बड़ी मात्रा में भारतीय शेयर बेचकर अपना पैसा क्यों निकाल रहे हैं?

उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भारतीय शेयर बाज़ार पर भारी दबाव डाल रही है। इसका खामियाजा विशेष रूप से उन छोटे निवेशकों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई और जीवनभर की बचत शेयर बाज़ार में लगाई हुई है।

हालांकि बाज़ार में गिरावट के लिए केवल विदेशी निवेशकों की बिकवाली जिम्मेदार नहीं है। अंतरराष्ट्रीय ब्याज दरें, डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की कीमतें, कंपनियों के ऊंचे मूल्यांकन और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता भी इसके प्रमुख कारण हैं।

प्रेम गर्ग ने कहा कि एक ओर विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयर बेच रहे हैं, तो दूसरी ओर घरेलू म्यूचुअल फंड, संस्थागत निवेशक और आम भारतीय नागरिक अपनी बचत का पैसा लगाकर बाज़ार को सहारा दे रहे हैं।

प्रेम गर्ग ने केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय से मांग की कि विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी के कारणों पर विस्तृत विश्लेषण सार्वजनिक किया जाए। साथ ही यह स्पष्ट किया जाए कि भारतीय शेयर बाज़ार को विदेशी निवेशकों के लिए पुनः आकर्षक बनाने तथा छोटे निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

प्रेम गर्ग ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का सपना निश्चित रूप से सराहनीय है, लेकिन आत्मनिर्भरता का अर्थ विदेशी पूंजी का पलायन नहीं होना चाहिए। वास्तविक आत्मनिर्भरता तभी होगी जब भारतीय अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बने कि विदेशी निवेशक भी यहां दीर्घकालीन निवेश करने में विश्वास रखें।

अंत में प्रेम गर्ग ने चुटकी लेते हुए कहा—

“पहले नारा था — विदेशी निवेश लाओ, भारत को आगे बढ़ाओ!

अब स्थिति यह है — विदेशी निवेशक अपना पैसा ले जाओ, भारतीय निवेशकों के भरोसे बाज़ार चलाओ!

अब सही में हम आत्मनिर्भर भारत की ओर चल रहे हैं!”

— प्रेम गर्ग

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