पर्यावरण सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा सी.एल. अग्रवाल डी.ए.वी. मॉडल स्कूल में ‘जामुन दिवस’ का आयोजन

चण्डीगढ़, 15 जुलाई, 2026: पर्यावरण सोसायटी ऑफ इंडिया, चण्डीगढ़ द्वारा सी.एल. अग्रवाल डी.ए.वी. मॉडल स्कूल, सेक्टर 7-बी, चण्डीगढ़ के सहयोग से वार्षिक ‘जामुन दिवस’ बड़े उत्साह एवं उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में जामुन (Syzygium cumini) वृक्ष एवं उसके फल के पर्यावरणीय, औषधीय, पोषण संबंधी तथा पारिस्थितिक महत्व के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था।
कार्यक्रम का शुभारम्भ विद्यालय की प्रधानाचार्या सुश्री ज्योतिका आहूजा के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने पर्यावरण सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा पिछले तीन दशकों से निरन्तर ‘जामुन दिवस’ मनाए जाने की सराहना की। उन्होंने जामुन के पोषण एवं औषधीय गुणों पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण तथा प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने का संदेश दिया।
इस अवसर पर पर्यावरण सोसायटी ऑफ इंडिया, चण्डीगढ़ के सचिव एवं भारतीय एकता मंच (पर्यावरण प्रकोष्ठ) के सचिव श्री एन. के. झींगन ने विद्यार्थियों को जामुन वृक्ष के विभिन्न उपयोगों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जामुन का फल, पत्तियाँ, छाल, जड़ तथा लकड़ी सभी अत्यंत उपयोगी हैं। उन्होंने कहा कि जामुन भारत के सबसे पौष्टिक फलों में से एक है तथा विशेष रूप से मधुमेह सहित अनेक जीवनशैली संबंधी रोगों में लाभकारी माना जाता है।
श्री झींगन ने बताया कि जामुन के फल पकने के मौसम में लगभग 95 प्रतिशत फल पेड़ों से गिरकर नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि फलदार वृक्षों के नीचे जाल (नेट) लगाया जाए, जिससे फलों को सुरक्षित एकत्रित कर उनका अधिकतम उपयोग किया जा सके। उन्होंने विद्यार्थियों से अधिकाधिक जामुन के पौधे लगाने तथा इस बहुमूल्य देशी वृक्ष के संरक्षण का आह्वान किया।
उन्होंने यह भी बताया कि पर्यावरण सोसायटी ऑफ इंडिया संभवतः देश की एकमात्र संस्था है, जो पिछले 30 वर्षों से निरन्तर ‘जामुन दिवस’ का आयोजन कर रही है, ताकि इस अत्यंत पौष्टिक देशी फल को लोकप्रिय बनाया जा सके तथा जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा मिले।
कार्यक्रम के सांस्कृतिक भाग में विद्यार्थियों ने जामुन के स्वास्थ्य, पोषण एवं पर्यावरणीय महत्व पर आधारित प्रभावशाली कविताएँ एवं प्रेरक भाषण प्रस्तुत किए, जिन्हें उपस्थित सभी लोगों ने खूब सराहा। कार्यक्रम में मायरा (कक्षा तृतीय), सरगुन, मनन, राधा, धानी, अशनीर तथा अनाया (कक्षा छठी) ने विशेष रूप से भाग लिया और जामुन के महत्व पर अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दीं।
विद्यालय के अध्यापकों ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में पूर्ण सहयोग दिया तथा विद्यार्थियों को उत्साहपूर्वक भाग लेने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने जामुन के बीजों के अंकुरण, पौध तैयार करने तथा इसके औषधीय गुणों से संबंधित अनेक जिज्ञासाएँ भी व्यक्त कीं। कुछ वरिष्ठ नागरिक, विशेषकर मधुमेह से पीड़ित लोग भी कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्होंने जामुन के स्वास्थ्य लाभों पर अपने अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों, अध्यापकों एवं अतिथियों को ताजे जामुन वितरित किए गए। सभी से अपील की गई कि वे जामुन खाने के बाद उसके बीजों को धोकर, सुखाकर गमलों अथवा उपयुक्त स्थानों पर बोएँ, ताकि अधिक से अधिक जामुन के पौधे तैयार किए जा सकें और हरित आवरण में वृद्धि हो।
इस अवसर पर श्री एन. के. झींगन, सचिव, पर्यावरण सोसायटी ऑफ इंडिया, चण्डीगढ़ एवं सचिव (पर्यावरण), भारतीय एकता मंच; सुश्री प्रीति कपानी, सुश्री अंजलि कपूर, सुश्री चाँदनी शर्मा, श्री आर. के. शर्मा, सरदार परमिंदर सिंह, श्री राकेश वर्मा, श्री अशोक कुमार तथा श्री रोहन सहित विद्यालय के अध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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