चंडीगढ़ की पर्यटन संभावनाएं अभी तक पूरी तरह विकसित नहीं हो सकी हैं, इसके लिए व्यापक रणनीति की आवश्यकता
समिति ने स्वच्छता, अनुशासन, सांस्कृतिक प्रोत्साहन और जनभागीदारी को सभी सरकारी पहलों का अभिन्न हिस्सा बनाने पर दिया जोर
चंडीगढ़, 25 जून
प्रशासक सलाहकार परिषद की कला, संस्कृति, पर्यटन एवं विरासत संरक्षण संबंधी वैधानिक समिति की बैठक आज सेक्टर-17 स्थित सिटको कार्यालय में समिति के अध्यक्ष एच.एस. लक्की की अध्यक्षता में आयोजित की गई।
बैठक में पर्यटन निदेशक सुश्री राधिका सिंह, संस्कृति निदेशक श्री नवीन रत्तू, मुख्य वास्तुकार विभाग, संग्रहालय विभाग के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं समिति के सदस्यों ने भाग लिया।
बैठक में चंडीगढ़ के पर्यटन, संस्कृति और विरासत क्षेत्रों को सशक्त बनाने से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। सदस्यों ने उत्तर भारत में चंडीगढ़ को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण और पर्यटक-अनुकूल नीति तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक को संबोधित करते हुए समिति के अध्यक्ष एच.एस. लक्की ने कहा कि भारत के सबसे सुनियोजित और सुंदर शहरों में शामिल होने के बावजूद चंडीगढ़ अभी तक अपनी विशाल पर्यटन क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं कर पाया है। उन्होंने कहा कि अपनी विशिष्ट वास्तुकला, हरित वातावरण, आधुनिक शहरी नियोजन और प्रसिद्ध स्थलों के कारण हर वर्ष लाखों पर्यटक चंडीगढ़ आते हैं, लेकिन इसे एक जीवंत पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की अभी भी अपार संभावनाएं हैं।
लक्की ने कहा कि पर्यटकों के लिए सुविधाजनक आधारभूत ढांचे के विकास के साथ-साथ नियमित सांस्कृतिक उत्सवों, हेरिटेज वॉक, कला प्रदर्शनियों, संगीत कार्यक्रमों और सार्वजनिक आयोजनों का आयोजन किया जाना चाहिए, ताकि शहर की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया जा सके।
उन्होंने विशेष रूप से सुखना झील की अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे पूरे वर्ष सांस्कृतिक और पर्यटन गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। यहां नियमित सांस्कृतिक कार्यक्रम, विरासत उत्सव, लोक कला प्रस्तुतियां, कला मेले, फूड फेस्टिवल और पर्यटन संबंधी आयोजन आयोजित किए जा सकते हैं, जिससे पर्यटकों की भागीदारी बढ़ेगी और चंडीगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी।
समिति ने स्थानीय कलाकारों, संगीतकारों, लोक कलाकारों, शिल्पकारों और सांस्कृतिक संस्थाओं को अधिक अवसर और मंच उपलब्ध कराने के उपायों पर भी चर्चा की। सदस्यों ने कहा कि उभरती प्रतिभाओं को संस्थागत सहयोग प्रदान किया जाना चाहिए ताकि चंडीगढ़ कला और रचनात्मकता का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सके।
चर्चा के दौरान एच.एस. लक्की ने नागरिकों में स्वच्छता और अनुशासन की भावना विकसित करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। जापान तथा अन्य देशों की अपनी हालिया यात्राओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा रही अनेक अच्छी व्यवस्थाओं से प्रेरणा ले सकता है।
उन्होंने कहा, “जापान जैसे देशों में जिस प्रकार स्वच्छता, सार्वजनिक अनुशासन, नागरिक जिम्मेदारी और सार्वजनिक स्थलों के प्रति सम्मान की संस्कृति देखने को मिलती है, उसे चंडीगढ़ में भी अपनाया जाना चाहिए। ऐसे मूल्यों को हमारी दैनिक नागरिक जीवनशैली का हिस्सा बनना चाहिए।”
लक्की ने सुझाव दिया कि पर्यटन और संस्कृति विभाग संयुक्त रूप से स्वच्छता, अनुशासन, नागरिक जिम्मेदारी और देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने के लिए जनजागरूकता अभियान चलाएं। ये अभियान स्कूलों, कॉलेजों, बाजारों, सामुदायिक केंद्रों और सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित किए जाएं ताकि विशेष रूप से युवाओं और विद्यार्थियों में अपने शहर के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी कार्यक्रमों और सांस्कृतिक आयोजनों को केवल कुछ चुनिंदा स्थानों या समाज के सीमित वर्गों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। इसके बजाय इन्हें चंडीगढ़ के प्रत्येक सेक्टर, कॉलोनी और गांव तक पहुंचाया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि समिति सरंगपुर में विकसित की जा रही आगामी इवेंट और कन्वेंशन सुविधाओं का दौरा करेगी, जहां चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा बड़े स्तर पर संगीत समारोहों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पर्यटन संबंधी आयोजनों की योजना बनाई जा रही है। सदस्यों ने मत व्यक्त किया कि इस प्रकार का आधारभूत ढांचा चंडीगढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
एच.एस. लक्की ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने विभागों की वर्तमान गतिविधियों, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुतियां समिति के सदस्यों के समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि समिति पर्यटन और सांस्कृतिक क्षेत्र को और मजबूत बनाने के लिए रचनात्मक सुझाव दे सके।
बैठक के अंत में समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि चंडीगढ़ के पर्यटन, संस्कृति और विरासत संरक्षण क्षेत्रों को कहीं अधिक व्यापक, व्यवस्थित और प्रभावी तरीके से बढ़ावा दिया जाना चाहिए। सदस्यों ने विश्वास व्यक्त किया कि उचित योजना, जनभागीदारी और नवाचारी पहलों के माध्यम से चंडीगढ़ देश के अग्रणी पर्यटन, संस्कृति और विरासत संरक्षण केंद्रों में अपना स्थान बना सकता है।
