इस अवसर पर कई प्रतिष्ठित संत एवं विद्वान उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से
प्राचार्य श्री भगवान दास जी (श्री सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय, सैक्टर-23 बी, चण्डीगढ़)
श्रद्धेय श्री विजय शास्त्री जी
पंडित हरीश शर्मा जी (सुप्रसिद्ध कथा वक्ता एवं भजन गायक)
इन सभी महानुभावों की उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा और अधिक बढ़ी।
सभा में वक्ताओं ने क्रमवार अपने विचार व्यक्त किए—
सर्वप्रथम
प्राचार्य श्री भगवान दास जी ने अपने उद्बोधन में शिक्षा, संस्कार एवं धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए युवाओं को भारतीय संस्कृति से जुड़ने का संदेश दिया।
तत्पश्चात
पंडित हरीश शर्मा जी ने भक्ति, नैतिक मूल्यों तथा समाज में सद्भाव बनाए रखने पर अपने प्रेरणादायी विचार प्रस्तुत किए।
इसके बाद
श्रद्धेय श्री विजय शास्त्री जी ने अपने उद्बोधन में धर्म, भक्ति और संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण परम पूज्य क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज के पावन प्रवचन रहे। उन्होंने अपने उपदेशों में
आध्यात्मिक जागरूकता
नैतिक मूल्यों का पालन
सामाजिक सद्भाव एवं सेवा भावना
जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनके आशीर्वचन सुनकर उपस्थित भक्तगण अत्यंत भाव-विभोर हुए।
इस भव्य कार्यक्रम को सफल बनाने में निम्न संस्थाओं एवं पदाधिकारियों का विशेष योगदान रहा—
भारतीय सांस्कृतिक ज्ञान संगठन के संस्थापक एवं प्रसिद्ध समाजसेवी श्री अनूप सरीन जी का विशेष योगदान रहा।
साथ ही दिगम्बर जैन सोसाइटी, सैक्टर-27 बी, चण्डीगढ़ का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
मंदिर प्रबंधन से जुड़े प्रमुख पदाधिकारी:
श्री धर्मबहादुर जैन जी — प्रधान
एडवोकेट आदर्श जैन जी — उपप्रधान
तरुण जैन जी — कार्यकारिणी सदस्य
अन्य प्रमुख सहयोगी:
श्री विजय जिंदल जी, श्री रजिंद्र जैन जी, पायलट सिंह जी ,श्री वी.के. जोशी जी, श्री अशोक चौधरी जी, श्री कुलदीप जी, श्री उमेश गौतम जी, श्री नरेश गोयल जी, श्री रमेश बतरा जी, श्री बर्फ सिंह पंवार जी, श्री कमल जी, श्री बतरा जी, श्रीमती राखी जी, श्रीमती सुनीता जी, श्रीमती उषा मानषी जी, श्रीमती रूबी गुप्ता जी, श्री रोहित जी सहित अनेक श्रद्धालुओं ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
कार्यक्रम का समापन मुनि श्री के आशीर्वचन एवं सभी उपस्थित श्रद्धालुओं के प्रति धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह विराट धर्म सभा श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा एवं सामाजिक जागरूकता का एक महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हुई।
अंत में श्रद्धालुओं के लिए जलपान की व्यवस्था भी की गई, जिसमें सभी उपस्थित श्रद्धालुओं ने जलपान ग्रहण किया।
