आज हिन्दू समाज एक बहुत ही नाजुक दौर से गुजर रहा है। गुरु–परंपरा, जिसे मूल रूप से ज्ञान, अध्यात्म और सत्य की ओर ले जाने का साधन माना गया था, आज कई जगह भ्रष्ट हो चुकी है। अनेक तथाकथित “गुरु” और बाबाओं ने इस परंपरा को व्यवसाय और शोषण का माध्यम बना लिया है। मार्गदर्शन देने के बजाय वे समाज को बाँटते हैं, गुमराह करते हैं और हिन्दू एकता की नींव को कमजोर करते हैं।
इस गुमराह करने का परिणाम दुखद है। अनेक हिन्दू मंदिरों में जाना छोड़ देते हैं, अपनी जड़ों से दूर हो जाते हैं और धीरे–धीरे अपने ही धर्म के प्रति नकारात्मक सोच विकसित करने लगते हैं। जब लोग ऐसे प्रभावों में आकर सनातन धर्म को छोड़ते हैं तो यह केवल उनकी आध्यात्मिक हानि नहीं होती, बल्कि पूरे समाज में विरोधी–हिन्दू विचार पनपने लगते हैं।
हमें यह याद रखना चाहिए कि हिन्दू धर्म की विशेषता उसकी सहनशीलता, करुणा और उदारता है। परन्तु इन गुणों का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। धर्म के नाम पर समाज को कमजोर करने वालों से सतर्क रहना हर सच्चे हिन्दू का पवित्र कर्तव्य है। हमें स्वयं भी दृढ़ रहना है और अपने मित्रों व परिजनों को पुनः मंदिरों और सनातन धर्म की सच्ची साधना से जोड़ना है।
यदि हम इस कर्तव्य में असफल रहे तो भविष्य में हमें बिखराव, दुर्बलता और यहाँ तक कि अस्तित्व–संकट का सामना करना पड़ सकता है। अन्य धर्मों के लोग अपने विश्वासों में एकजुट रहते हैं। मुसलमान, ईसाई, सिख आदि लोग झूठे गुरुओं और पाखंडी सम्प्रदायों के चक्कर में नहीं पड़ते। परन्तु हिन्दू, अपनी सहज उदारता के कारण, अनेक बार बँट जाते हैं और इसका परिणाम पूरे समाज की कमजोरी के रूप में सामने आता है।
लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हिन्दू धर्म केवल एक धर्म नहीं, बल्कि सनातन धर्म है—वह शाश्वत जीवन पद्धति है जिसने सम्पूर्ण मानवता को महान दार्शनिक विचार, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और मानवीय मूल्य दिए हैं। सनातन धर्म ही सभी धर्मों की जननी है। कोई भी संप्रदाय, कोई भी तथाकथित गुरु, सनातन धर्म की गहराई और महानता से ऊपर नहीं हो सकता।
अब हमारा कर्तव्य क्या है?
1. मंदिरों को सहयोग दें, झूठे बाबाओं को नहीं।
हमारी श्रद्धा, दान और सेवा से हमारे मंदिर सशक्त हों, शोषकों का साम्राज्य नहीं।
2. सनातन धर्म में दृढ़ रहें। अपनी विरासत पर गर्व करें, अपने बच्चों को इसके मूल्य सिखाएँ और उन्हें जीवन में उतारें।
3. एकजुट रहें।
चाहे झूठे गुरु हों, बाहरी लॉबी हो या कोई भी विरोधी ताकत—धर्म विरोधी प्रभावों का डटकर विरोध करें।
4. दर्शन को जीवन में उतारें।
हिन्दू धर्म का सार सत्य, अध्यात्म और आनंद में है। इन मूल्यों को जीकर ही हम सनातन धर्म के सच्चे प्रतिनिधि बन सकते हैं।
याद रखिए—हमारा और हमारे बच्चों का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि आज हम अपने धर्म के साथ कितनी दृढ़ता से खड़े हैं। सनातन धर्म ने हजारों वर्षों तक असंख्य चुनौतियों का सामना किया है और आगे भी करेगा—बशर्ते हम सतर्क, संगठित और अपने धर्म पर गर्व करने वाले हिन्दू बनें।
सच्चे हिन्दू बनें। अपने धर्म की रक्षा करें। दृढ़ रहें।
