साहित्य सरिता के 109वें संस्करण में कवि गोष्ठी आयोजित

चंडीगढ़, 4 अक्टूबर। संस्कार भारती चंडीगढ़ एवं बृहस्पति कला केंद्र के संयुक्त संयोजन में साहित्य सरिता के 109वें संस्करण के अंतर्गत कवि गोष्ठी का आयोजन स्थानीय प्राचीन कला केंद्र में किया गया। कार्यक्रम में 17 कवियों एवं शायरों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुतियां दीं।

कार्यक्रम का शुभारंभ संस्कार भारती चंडीगढ़ के संरक्षक एवं बृहस्पति कला केंद्र के संस्थापक प्रो. सौभाग्य वर्धन ने सभी रचनाकारों का स्वागत करते हुए किया। कवि गोष्ठी में प्रतिभा माही ने अपनी रचना, “पांव जख्मी थे तो भी मैं चलती रही, बात इतनी सी लोगों को खलती रही” सुनाकर खूब तालियां बटोरीं।

कुसुम धीमान ने “पहुंच गए प्रौढ़ावस्था में, सोच-समझ पग धरना है, दे जाएं जग को कुछ अच्छा, नेक कार्य नित करना है” प्रस्तुत किया। राजीव गुप्ता ने “कैसे हाल-ए-दिल हम सुनाएं तुम्हें, कैसे जख्म-ए-दिल हम दिखाएं तुम्हें” सुनाया। गुलशन चमौली ने “तुम चारु चंद्र चंचल समान चंद्र लोक की चंद्रावली जैसी, तुम तारामंडल की आभा में बसी इंद्र लोक की इंद्रावली जैसी” रचना प्रस्तुत की।

हास्य कवि अनवर अंसारी ने “सिर्फ स्पेशल वाले छोले-भटूरे खाकर भटूरा हुआ हूं, मैंने कौन-सा किसी मंदिर का चंदा खाया है” सुनाकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। कवयित्री नेहा अरोड़ा ने पुराने दौर की यादें ताजा करते हुए कहा, “80 का दशक था, कितना सुहाना था, हर शख्स अपने आप में खुशियों का खजाना था। न मोबाइल की चमक थी, न स्क्रीन का सिलसिला, फिर भी हर एक चेहरे पर हंसता जमाना था।”

कृष्णा गोयल ने “लक्ष्य जीतना है तो सोचिए बस यही, बाकी हैं तीर अभी मेरे कमान में” प्रस्तुत किया। गुरदीप गुल ने गजल “मेरी गजलों, मेरी नज्मों, अभी कागज पे न उतरो, अहसास-ए-लम्स, तिलिस्म-ए-हर्फ अभी सांसों में भरो” पेश की। करिश्मा वर्मा ने नारी शक्ति पर अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा, “समस्त जगत में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करो, रणचंडी का रूप धार तुम शस्त्रों से श्रृंगार करो।”

श्याम सुंदर ने रामायण के संदेश पर आधारित रचना प्रस्तुत करते हुए कहा, “रामायण हमें सिखलाती तप, त्याग और प्रेम के गुण महान, जीवन कैसे जीना है, हर जन को देती है ये ज्ञान।” पवन मुन्तजिर ने अपनी रचना “बदला मौसम चक्र भी, बदला है संसार। मानव विषधर बन गया, मारे है फुंकार” सुनाई।

गोष्ठी में अशोक नादिर भंडारी, गणेश दत्त बजाज, सुदेश मौदगिल नूर, डॉ. तिलक सेठी, कीमती केसर और जगदीश सिंह खुशदिल ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।

कार्यक्रम का मंच संचालन कवि एवं साहित्यकार राजेश आत्रेय ने किया। कार्यक्रम के अंत में प्रो. सौभाग्य वर्धन ने सभी कवियों, शायरों एवं उपस्थित श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।

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