चंडीगढ़, 30 अगस्त 2026: प्राचीन कला केन्द्र द्वारा आज एम.एल. कौसर सभागार में गुरमति संगीत के क्षेत्र में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान केन्द्र द्वारा तैयार किए गए गुरमति संगीत में तबला/जोड़ी वादन के सिलेबस का विधिवत विमोचन किया गया। इसके साथ ही 12वीं गुरमति संगीत बैठक का भी आयोजन किया गया, जिसमें पुरातन कला पंजाब घराना की संगीत परंपरा के अनुरूप मधुर कीर्तन एवं तबला वादन की प्रस्तुतियों ने संगत को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में पंजाब घराना के गुरु एवं प्रसिद्ध तबला वादक उस्ताद कुलविंदर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर पंजाब घराना के वरिष्ठ एवं जाने-माने तबला गुरुओं उस्ताद काले राम, उस्ताद हरभजन सिंह एवं उस्ताद कुलविंदर सिंह द्वारा प्राचीन कला केन्द्र के गुरमति संगीत सिलेबस का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में गुरमति संगीत के क्षेत्र से जुड़ी अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने भी शिरकत की। इस अवसर पर प्राचीन कला केन्द्र के सचिव श्री सजल कौसर उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन प्राचीन कला केन्द्र के गुरमति संगीत विभाग के प्रमुख श्री मलकीत सिंह जडियालां ने किया। श्री मलकीत सिंह जडियालां ने गुरमति संगीत के संरक्षण, प्रचार-प्रसार एवं शिक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि प्राचीन कला केन्द्र द्वारा तैयार किया गया यह सिलेबस गुरमति संगीत के विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। सिलेबस में तबला एवं जोड़ी वादन से संबंधित महत्वपूर्ण तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारियों को व्यवस्थित रूप से शामिल किया गया है। इससे न केवल देश बल्कि विदेशों में रह रहे गुरमति संगीत के विद्यार्थी भी लाभान्वित हो सकेंगे और गुरमति संगीत की पारंपरिक वादन शैली को सीखने एवं आगे बढ़ाने में उन्हें सहायता मिलेगी।
सिलेबस के विमोचन के पश्चात 12वीं गुरमति संगीत बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में उस्ताद कुलविंदर सिंह जी के विद्यार्थियों एवं शिष्यों द्वारा शबद गायन एवं तबला वादन की प्रस्तुतियाँ दी गईं।”
कार्यक्रम की शुरुआत राग मलार में निर्धारित शब्द गायन से हुई। कलाकारों द्वारा गुरमत मर्यादा के अनुरूप शब्द-कीर्तन प्रस्तुत किया गया। इस दौरान “हरिजन बोलत श्रीराम नामा”, “राजन के राजा महासेज हूँ के साजा” तथा “अनजान बिहीन है निरंजन प्रबीन है” जैसे निर्धारित शब्दों का गायन प्रस्तुत कर संगत को आध्यात्मिक आनंद से अभिभूत कर दिया।
इसके पश्चात तबला वादन की प्रस्तुति दी गई, जिसमें कलाकारों ने सुल्फक ताल, चार ताल, तीव्र ताल एवं तीन ताल में अपनी वादन कला का प्रदर्शन किया। प्रस्तुतियों में गुरमति संगीत की पारंपरिक शैली, लयकारी एवं तबला \जोड़ी वादन की समृद्ध परंपरा का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
कार्यक्रम का प्राचीन कला केन्द्र के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर लाइव प्रसारण भी किया गया, जिससे देश-विदेश के संगीत प्रेमियों एवं विद्यार्थियों ने कार्यक्रम का लाभ उठाया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्राचीन कला केन्द्र के सचिव श्री सजल कौसर एवं अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा कलाकारों को स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) प्रदान कर सम्मानित किया गया। श्री सजल कौसर ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, कलाकारों, गुरुओं एवं संगत का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्राचीन कला केन्द्र भारतीय शास्त्रीय एवं गुरमति संगीत की समृद्ध परंपराओं के संरक्षण और नई पीढ़ी तक उन्हें पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
