प्राचीन कला केंद् एवं
बृहस्पति कला केंद्र द्वारा
काव्य गोष्ठी का आयोजन प्राचीन कला केन्द्र सेक्टर 35 चंडीगढ़ मे किया जिसमे में शहर के जाने माने कवियों और कवित्रियों ने अपनी कविताओं से स्वर्गीय बलबीर बाहरी तन्हा जी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। साहित्य सरिता की काव्य गोष्ठी का वरिष्ठ साहित्यकार प्रेम विज, चमन शर्मा चमन और डॉक्टर विभा राय जैसे गणमान्य साहित्यकार के संबोधन के साथ आगाज हुआ इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन डॉ मंजू चौहान ने किया। गोष्ठी में ज्योति रंजन, प्रीति, अमित कुमार, जया सूद,श्याम सुंदर, रोहित सिंह, सुरेंद्र पाल काकरोड़, करिश्मा वर्मा, प्रिया कुमारी, सुखविंदर पठानिया, दर्शन सिंह, कुसुम धीमान, केपी सिंह, राजेश कपिल, सरबजीत कौर, नीतू कुमारी, डॉ विभा राय आदि कवियों ने अपनी खूबसूरत कविताएं प्रस्तुत की। डॉक्टर मंजू चौहान ने
कभी-कभी तो ये लगता है
बेमतलब सब सपने है क्या?
लफ़्ज़ किसी के अपने है क्या?
दर्शन सिंह कहते हैं
हम-तुम
घण्टों बतियाते थे
खुली छत पर
दुपहरी..संध्या…रात्रि हम-तुम
कवि के पी सिंह ने अपनी बात कुछ यूं रक्खी:
पी पी हुंजुवा का तेल दिल जलदा रिहा
सुबह आंउदी रही दिन ढलदा रिहा
कवियित्री नीतू कुमारी “नितुंजलि” ने कहा
मुकम्मल सी है ज़िन्दगी तुम्हारे बिना ।
तथा हे कृष्ण कन्हैया ।
कवियत्री सरबजीत कौर ने अपनी बात कुछ यूं रक्खी:
ਨਵੀਂ ਸਵੇਰ ਚੜਦੀ ਏ ਪਰ ਰੰਗ ਪੁਰਾਣੇ ਨੇ,
ਚਿਹਰੇ ਨਵੇਂ ਹੋ ਗਏ ਨੇ ਪਰ ਰੰਗ ਪੁਰਾਣੇ ਨੇ।
राजेश कपिल कहते हैं-
जी लो जिंदगी हर लम्हा बस एक ख्वाब है
कल का नहीं भरोसा ना कोई ऐतबार है
वहीं कुसुम धीमान ‘कलिका’ जीवन की सच्चाई पर प्रकाश डालती हैं कि
हाँ अंतिम शय्या पर जब हम, पड़े मिलेंगे।
सुनो सखा ये चार लोग तो, खड़े मिलेंगे॥
मैं नारी हूं, कमजोर नहीं,
मै अग्नि हूं, अंगारों की।
सुनाकर प्रिया कुमारी ने दर्शकों में जोश भर दिया।श्याम सुंदर जी ने आंखों को दिल का आईना बताते हुए कहा
आंखें बोलती हैं
भेद दिलों के खोलती है
जया सूद कहती हैं
सृजि हैं यह प्यारी दुनिया भगवान ने,
चला रहा हैं वो सृष्टि अपने प्यार से
सुखविंदर सिंह पठानिया ने कहा
ये जो तूने साड़ी के, सिलवटों को समेट के रखा है,
बड़े इत्मीनान से,हर एक पहलू को लपेट के रखा है!
गोष्ठी के अंत में राजन सुदामा ने सभी कवियों और कवयित्रियों का धन्यवाद किया।
प्राचीन कला केंद् एवं बृहस्पति कला केंद्र द्वारा काव्य गोष्ठी का आयोजन
