चंडीगढ़ ( )श्री राधा माधव सेवा ट्रस्ट, चण्ढीगढ़ द्वारा
श्री शिव महापुराण कथा ज्ञान तथा भक्ति यज्ञ
2 नवंबर तक
सायं 4 बजे से 7 बजे तक कथा व्यास श्री हरि जी महाराज के श्रीमुख से सैक्टर -51 सी, चण्डीगढ़ मे हो रही
कथा मे आज भजन द्वारा
“शिव नाम नहीं तो जीना क्या”,,,,,,,,,
भजन,का अर्थ बताया कि भगवान शिव के नाम के बिना जीवन व्यर्थ है। यह पंक्ति भक्ति और आध्यात्मिक विश्वास पर जोर देती है, जिसके अनुसार शिव का नाम अमृत के समान है
इसके साथ ही ज्योति स्तंभ की कथा अनादि ज्योति जो सदाशिव का स्वरूप है, और ब्रह्माजी उनके द्वारा रचित सृष्टि की रचना और पालन के समय ब्रह्माजी और विष्णुजी के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। तब सदाशिव ने हस्तक्षेप कर यह स्पष्ट किया कि वे ही उनके जन्मदाता हैं। उन्होंने ब्रह्माजी को सृष्टि की रचना करने और विष्णुजी को उसका पालन करने का कार्य सौंपा। कथा का मुख्य संदेश के बारे मे बताया कि त्रिदेव ज्योति स्वरूप सदाशिव के ही अंश हैं और उनके द्वारा ही सृष्टि की रचना और संचालन होता है। ब्रह्माजी को सृष्टि का रचयिता माना जाता है, जबकि विष्णुजी पालक हैं और शिव संहारक।
भजन,
बेल पत्री में क्या गुण है, भोला होया मतवाला,
होया मतवाला भोला होया मतवाला,
बेल पत्री में क्या गुण है, भोला होया मतवाला,,,,,,,
कथा मे बताया की जब भोलेनाथ को बेलपत्र चढ़ाया जाता है, तो उनका प्रिय भोग “बेलपत्र”, “जल”, “धतूरा”, “भांग” और “सफेद मिठाई” जैसी वस्तुएं ह शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करके भोले की कृपा होती
कथा उपरांत आरती कर भंडारा प्रसाद वितरित किया गया
