पिता पुत्र की जोड़ी द्वारा खूबसूरत भरतनाट्यम एवं कुचिपुड़ी प्रस्तृतियों से सजी केंद्र की 311वी मासिक बैठक

प्राचीन कला केंद्र द्वारा हर माह आयोजित होने वाली मासिक बैठकों का सिलसिला निरंतर पिछले 25वर्षों से जारी है। आज इन मासिक बैठकों की 311वी कड़ी में चंडीगढ़ के युवा एवं प्रतिभावान भरतनाट्यम नृतक राहुल गुप्ता एवं उनके सुपुत्र भारत गुप्ता द्वारा भरतनाट्यम एवं कुचिपुड़ी नृत्य की ख़ूबसूरत प्रस्तुति पेश की गई। इस कार्यक्रम का आयोजन केंद्र के एम एल कौसर सभागार में सायं 6 :30 बजे से किया गया।

आज के कलाकार राहुल गुप्ता युवा एवं प्रतिभावान कलाकार हैं , उन्होंने अपने हाव भाव और अपनी विलक्षण प्रतिभा के बल पर देश ही नहीं विदेशों में भी अपने प्रदर्शन से प्रशंसा हासिल की है और साथ ही इनके सुपुत्र भारत गुप्ता के लिए होनहार बिरवान के होत चीकने पात” लोकोक्ति बिलकुल सटीक बैठती है क्योंकि इतनी कम आयु में इतने खूबसूरत हाव भाव एवं नृत्य करना प्रशंसनीय है। राहुल गुप्ता प्राचीन कला केंद्र से संबद्ध सेंटर भी चलाते हैं

आज की नृत्य प्रस्तुति में सबसे पहले भारत गुप्ता द्वारा कुचिपुड़ी नृत्य पेश किया गया जिस में भगवन कृष्ण की स्तुति पेश की गयी। इसके उपरांत पिता राहुल गुप्ता द्वारा पेरू नाट्यांजलि की खूबसूरत प्रस्तुति पेश की गयी। भगवान शिव पर आधारित भरतनाट्यम नृत्य प्रस्तुति से भारत ने दर्शकों की तालियां बटोर कर अपनी नृत्य प्रतिभा का बखूबी प्रदर्शन किया। इसके उपरांत राहुल गुप्ता द्वारा भगवान कृष्ण को समर्पित आदूरम मधुरम पेश करके दर्शकों का दिल जीत लिया। नृत्य का आधार भगवान श्री कृष्ण एवं देवादि देव महादेव हैं।भगवान श्री कृष्ण एवं शिव दोनों ही नृत्य कला के आराध्य के रूप में माने जाते हैं। और अपनी अगली प्रस्तुति में भारत गुप्ता ने जहाँ त्रिदेव पर आधारित नृत्य प्रस्तुत किया वहीँ राहुल ने आराध्य शिव के चंद्रचूड़ रूप का बखूबी प्रदर्शन किया । इसके बाद भारत ने भगवान विष्णु की स्तुतित भरतनाट्यम नृत्य के माध्यम से करते हुए खूब तालियां बटोरी। कार्यक्रम का समापन इन्होने ने पारम्परिक मंगलम से किया जिसमें दोनों पिता पुत्र ने वाहवाही लूटी।

कार्यक्रम के अंत में केंद्र के सचिव श्री सजल कौसर द्वारा उत्तरीया एवं मोमेंटो देकर कलाकारों को सम्मानित किया गया।

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