चंडीगढ़, 4 जनवरी (21 पोह, नानकशाही संवत 557):
समूची नानकनाम लेवा संगत द्वारा साहिब-ए-कमाल श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाश पर्व बड़ी श्रद्धा और सत्कार के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर गुरुद्वारा कलगीधर खेड़ी, सेक्टर–20 में कथा-कीर्तन दीवान सजाए गए, जिनमें श्री दरबार साहिब, अमृतसर से पधारे हजूरी रागी जत्थों सहित अनेक रागी संगतों ने हाजिरी भरी।
कीर्तन दीवान में विशेष तौर पर भाई बलविंदर सिंह लाड़ी हजूरी रागी श्री दरबार साहिब अमृतसर, भाई गुरदित्त सिंह जी हजूरी रागी श्री दरबार साहिब अमृतसर, बीबी कमलजीत कौर मोहाली, इस्त्री सत्संग जथा गुरुद्वारा कलगीधर खेड़ी सेक्टर-20, भाई प्रेम सिंह जी (चंडीगढ़) तथा भाई दिलवर सिंह जी (गुरुद्वारा कलगीधर खेड़ी) ने गुरबाणी कीर्तन द्वारा संगत को निहाल किया।
गुरुद्वारा साहिब के मुख्य ग्रंथी भाई इंद्रजीत सिंह जी ने गुरु साहिब के जीवन, उनके महान बलिदानों और सिख इतिहास संबंधी विचार साझा किए। तत्पश्चात सरबत के भले की अरदास हुई, हुकमनामा साहिब लिया गया और गुरु का अटूट लंगर बरताया गया।
शाम के समय भी विशेष कीर्तन दरबार सजाया गया, जिसमें भाई जगतार सिंह जी (राजपुरा), हजूरी रागी श्री दरबार साहिब अमृतसर ने हाजिरी भरी।
समागम के दौरान गुरु घर की प्रबंधक कमेटी के सेक्रेटरी हुकम सिंह जी, मोहिंदर सिंह जी, गुरप्रीत सिंह जी, हरमीत सिंह जी, कुलवंत सिंह जी, जगदीश सिंह जी तथा मुख्य सेवादार भाई गुरइंदर बीर सिंह जी उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी sangat ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और गुरु साहिब की कृपा प्राप्त की।
उन्होंने कहा कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने धर्म की रक्षा के लिए अपना पूरा परिवार कुर्बान कर दिया। उनका जीवन सत्य, धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है तथा समूचे सिख पंथ को उनके जीवन से अमूल्य शिक्षा मिलती है। समागम की सफलता हेतु समूची साध-संगत और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का विशेष धन्यवाद किया गया।
