श्री मद भागवत कथा और वृन्दावन प्राक्टय उत्सव के छटे दिन भगवान श्री कृष्ण को 56 व्यंजनों के भोग लगाए

  • समय निकाल कर भगवान की अराधना जरुर करनी चाहिए: इंद्रेश महाराज
  • रावण का दोगलापन ही आज तक रावण का दहन करवा रहा है, हमेशा एक लक्ष्य रखें : इंद्रेश महाराज

चंडीगढ़, 2अक्टूबर 2025

श्री कृष्ण प्रिया जू संकीर्तन मंडल के तत्वाधान में सेक्टर 34 के मेला ग्राउंड में वृन्दावन प्राक्टय उत्सव और श्री मद भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है, जो 3 अक्टूबर तक चलेगा I प्रसिद वक्ता संदीप चुग ने खूबसूरती से मंच का संचालन किया I पंडित रसराज जी महाराज और श्याम सिंह चौहान जी महाराज निज मंदिर खाटू श्याम भी कथा श्रवण करने पहुंचे ।

कथा के प्रारंभ में ही कथावाचक श्री इंद्रेश उपाध्य महाराज जी ने संपूर्ण चण्डीगढ़वासियों को दशहरे की शुभकामनाएं दी I आज कथा में गिरिराज पूजन हुआ और श्री गिरधर लाल जी को भक्तों द्वारा लाया गया 56 भोग लगाया गया।

कथा का छटे दिन आज आरती और हरि के भजनों के साथ धूमधाम से शुरु हुआ। उसके बाद विश्व विख्यात कथा व्यास परम पूज्य श्री इंद्रेश महाराज ने भगवान श्री कृष्ण को 56 भोग लगाने की कहानी बताई। उन्होंने कहा कि हमे अपने व्यस्त समय में से भगवान को भी समय देना चाहिए और उनकी अराधना करनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि इंद्र देव के प्रकोप से ब्रजवासियों को बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठा लिया था। इसके बाद उन्हें सात दिनों के लिए भूखा रहना पड़ा था, जिसके बाद उन्हें सात दिन आठ पहर के हिसाब से 56 व्यंजन खिलाए गए थे। तभी से यह ’56 भोग’ परंपरा की शुरुआत हुई है।

महाराज जी ने कहा कि रावण कोई व्यक्ति नहीं है, रावण एक स्वभाव है, जैसे रावण दो नाव पर पैर रखता था एक तरफ शिव पूजा और दूसरी और छल कपट का स्वभाव भी रखता था, और रावण का अंत भी अच्छा नहीं था, आज तक रावण का दहन होता आ रहा है, इस लिए एक को ही लक्ष्य बनाए और अपने व्यवहार विचार में कभी दोगलापन नहीं लाना, शुभ अंत के लिए एक तरफ ही रहो।

श्री राम जी ने रावण को बहुत संकेत दिए, लेकिन रावण उन संकेतों को नहीं समझ पाया, ठीक इसी तरह कलयुग में भी मानव को बहुत संकेत मिलते है और उन संकेतों को सिर्फ एक सत्संगी और भजनानंदी ही समझ पाता है और कुभवो का त्याग कर देता है

अंग्ध भक्त के चरित्र का बखान किया, महाराज जी ने बताया कि कथा श्रवण करने इंसान खुद अपनी मर्जी से नहीं आता, किशोरी जी जिन पर प्रसन्न होती है उन पर ही कथा की कृपा बरसती है, और पूर्व जन्म का भजन इनको अगले जन्म में भी खींच कर लाता है

राधा रानी के भजनों पर संपूर्ण कथा श्रवण करने पहुंचे I चंडीगढ़वासी अपने आपको नृत्य करने से रोक नहीं पाए I पूरा पंडाल वृंदावन और बरसाना धाम में परिवर्तित होता हुआ दिखा, कथा के छठे दिन डांडिया उत्सव भी आनंद के साथ मनाया गया।

मुनीश बजाज, सयोंजक ने बताया की कथा सुनने आये सभी भक्तो के लिए गोरी शंकर सेवा दल, चंडीगढ़ गुप्ता प्लाइवुड से सचिन गोयल और माता मनसा देवी सेवा ट्रस्ट के प्रधान की और से फ्री लंगर लगाया गया है और कुछ भक्तो के सहयोग से चाय और मीठे पानी की छबील भी लगवाई जा रही है I

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