प्राचीन कला केंद्र की मासिक कड़ी परंपरा में कत्थक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों ने जीता दर्शकों का दिल

Chandigarh

प्राचीन कला केंद्र द्वारा हर माह आयोजित की जाने वाली मासिक लड़ी परंपरा में केंद्र में नृत्य की शिक्षा प्राप्त कर रहे कलाकारों द्वारा आज यहाँ केंद्र के सेक्टर 71 मोहाली परिसर में स्थित डॉ शोभा कौसर सभागार में एक विशेष नृत्य संध्या का आयोजन सायं 6:00 बजे से किया गया। जिस में गुरु योगेश शर्मा के निर्देशन में नृत्य की शिक्षा प्राप्त कर रहे शिष्यों द्वारा कत्थक नृत्य की विभिन्न प्रस्तुतियां पेश की गयीं। इस कार्यक्रम में लगभग 40 बच्चों के भाग लिया।

प्राचीन कला केंद्र ने इस मासिक कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों के बहुपक्षीय विकास , मंच प्रदर्शन और व्यक्तित्व को निखारने और एक नयी दिशा में विकसित करने हेतु शुरू किया गया था । आज के कार्यक्रम में कलाकारों ने खूबसूरत प्रस्तुतियां पेश करके दर्शकों की तालियां बटोरी।

आज के कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना जिस के बोल थे “गए गणपति ” से हुई जिस में केंद्र में बांग्लादेश से आये नाहयान चौधरी ने भाग लिया। जिस में उन्होंने कत्थक नृत्य के माध्यम से प्रस्तुति पेश की।

इस के बाद शुद्ध कत्थक नृत्य पेश किया गया जिस में सेहर , रीत , अवंतिका , शिवानी , चाहत , रिद्धिमा , अदिति , स्निग्धा , समृद्धि , शाम्भवी , सुजीता ,ऐशानी , सायरा तथा देवांशी द्वारा कत्थक नृत्य प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम के अगले भाग में शिव स्तुति “शिवम सुंदरम ” पेश की गयी जिस में आर्या , मन्नत , प्राची , प्रियम एवं अनाया ने खूबसूरत नृत्य पेश करके तालियां बटोरी।

इसके उपरांत बच्चों द्वारा कृष्ण भजन पेश किया गया और इस में मनीषा , रूपा , नवनीता , नताशा , भव्या ,श्वेता और वैदेही ने भाग लिया।

कार्यक्रम के अंत में सरगम पेश की गयी जिस में अनधिका , आशी, वृद्धि , अनाहिता , मंजू , मधुमिता , रूबी एवं नानकी ने सुन्दर नृत्य पेश करके दर्शकों को आंनदित कर दिया।
आज के कार्यक्रम में हारमोनियम और पढंत पर गुरु योगेश शर्मा , गायन पर उन्नति शर्मा , तबले पर अक्षय शर्मा और भास्कर ने बखूबी संगत की। कार्यक्रम के अंत में केंद्र की एडिशनल रजिस्ट्रार डॉ समीरा कौसर ने प्रशंसा भरे शब्दों से कलाकारों का हौसला बढ़ाया और गुरु योगेश शर्मा की प्रशंसा करते हुए उनका सम्मान किया।

केंद्र के इस प्रयास से विद्यार्थी न केवल मंच प्रदर्शन करके अपनी कला को आत्मविश्वास के साथ बखूबी प्रस्तुत कर रहे हैं बल्कि भारत के प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को समृद्धि दिलाने में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करके केंद्र की भूमिका अहम है।

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