मनीमाजरा की 7.7 एकड़ की बिक्री को लेकर महाघोटाले की आशंका

  • विपक्षी पार्षदों ने चंडीगढ़ प्रशासक को पत्र लिख जांच की मांग की

चंडीगढ़:–नगर निगम की बीते दिनों हुई बैठक में मनीमाजरा की 7.7 एकड़ भूमि की बिक्री संबंधी एजेंडे को जिस तरह से सत्ता पक्ष के पार्षदों ने आनन फानन में
बिना चर्चा के पारित किया गया। उसको लेकर विपक्षी पार्षदों को नगर निगम को भारी राजस्व हानि पहुँचाने वाले महाघोटाले की आशंका हो रही है। विपक्षी पार्षदों सीनियर डिप्टी मेयर जसबीर सिंह बंटी, डिप्टी मेयर तरुणा मेहता पार्षद प्रेमलता
का आरोप है कि सत्ता पक्ष ने जिस तरह से कांग्रेस और आप के पार्षदों को मार्शल बुला कर जबरन बाहर भिजवाया और आनन फानन में एजेंडे को पारित किया। जरूर इसमें कुछ घोटाला होगा, तभी बिना चर्चा के इसे पारित किया। विपक्षी पार्षदों ने इसको लेकर चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिख कर इस मामले की गहनता से जांच करने की मांग की है। सीनियर डिप्टी मेयर जसबीर सिंह बंटी, डिप्टी मेयर तरुणा मेहता पार्षद प्रेमलता का मानना है कि इससे न केवल नगर निगम को 200 से 300 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त राजस्व नुकसान होगा। बल्कि यह सौदा शहर के विकास कार्यों और वित्तीय स्थिरता के साथ सीधी धोखाधड़ी भी है। यह पूरा मामला भ्रष्टाचार और मिलीभगत की ओर इशारा करता है और इसे चंडीगढ़ नगर निगम के इतिहास का एक महाघोटाला कहा जा सकता है।

सीनियर डिप्टी मेयर जसबीर सिंह बंटी, डिप्टी मेयर तरुणा मेहता पार्षद प्रेमलता ने प्रशासक महोदय से आग्रह किया कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जाँच करवाई जाए, एजेंडे को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और दोबारा चर्चा कर सभी पार्षदों की सहमति से इसको पास कराया जाए ओर गलत मंशा से इस एजेंडे को पास कराने वालो के खिलाफ कठोर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। साथ ही भविष्य में नगर निगम की किसी भी संपत्ति के सौदे में पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया अनिवार्य की जाए, जिससे जनहित और नगर निगम की आय बढ़े ओर सुरक्षित रह सके।

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