पंजाब में आयुर्वेदिक शिक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार का खुलासा: परमिंदर भट्टी

संजीव गोयल का काला सच: सेवानिवृत्त होने के बावजूद बने हुए हैं रजिस्ट्रार:परमिंदर भट्टी

भ्रष्टाचार की परतें उधेड़ता पंजाब, आयुर्वेदिक शिक्षा प्रणाली में घुट रहा कायदा: केतन शर्मा

आयुर्वेद के शैक्षणिक नियमों का उल्लंघन, पारिवारिक लाभ के लिए शक्तिशाली रजिस्ट्रार की धांधली: परमिंदर भट्टी

पंजाब में आयुर्वेदिक शिक्षा प्रणाली के खिलाफ उठी आवाज, संगठित नकल का मामला आया सामने: केतन शर्मा

चंडीगढ़, 3 अक्तूबर 2025 । सामाजिक कार्यकर्ता परमिंदर कुमार भट्टी ने पंजाब की आयुर्वेदिक शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार का खुलासा किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि गुरु रविदास आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार (अतिरिक्त प्रभार) संजीव गोयल पिछले 8 वर्षों से इस पद पर बने हुए हैं, जबकि उनकी शैक्षणिक योग्यता इस पद के लिए पूरी नहीं है। भट्टी ने कहा कि यह व्यक्ति पंजाब की आयुर्वेदिक शिक्षा प्रणाली के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है।

गौर करने वाली बात यह है कि संजीव गोयल ने जून 2020 में सेवानिवृत्ति की उम्र पूरी की, लेकिन उसके बावजूद भी वे अपनी सेवाएँ जारी रखते हुए सरकारी वेतन ले रहे हैं। भट्टी ने कहा कि सरकार के दिशा-निर्देशों के विपरीत वे इस पद पर बने रहने में सफल रहे हैं, जो कि नियमों का उल्लंघन है। प्रदेश में कांग्रेस और अब आम आदमी पार्टी की सरकारें भी इस पद के लिए स्थायी रजिस्ट्रार तलाशने में असफल रही हैं।

भट्टी ने बताया कि संजीव गोयल ने अपनी स्थिति का फायदा उठाते हुए अपने बेटे और बहू को आयुर्वेद में पीएचडी करवाने का अवसर दिया। इसके अलावा, वे टॉम व स्मिता दवाओं का व्यापार करने वाले फर्जी डॉक्टरों को भी संरक्षण दे रहे हैं, जो आयुर्वेदिक दवाएं बेचते हैं। भट्टी ने कहा कि “यदि इनकी उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की जाए, तो सामूहिक नकल के मामले भी सामने आएंगे।”

आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा पद्धति बोर्ड और गुरु रविदास आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय जैसे प्रमुख संस्थानों की स्थिति चिंताजनक है।
केतन शर्मा के अनुसार, पंजाब सरकार के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में कोई कार्रवाई करने में असमर्थ हैं। इससे स्पष्ट होता है कि संजीव गोयल का प्रभाव कितना बड़ा है।

यह भी खुलासा किया कि संजीव गोयल ने अपने कार्यकाल के दौरान बड़ी मात्रा में संपत्ति अर्जित की है। हाल ही में उन्होंने चंडीगढ़ के सेक्टर 40-बी में 8 करोड़ रुपये का मकान खरीदा तथा मोहाली में करोड़ों रुपये का औद्योगिक प्लॉट भी उनके पास है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने ग्रे मार्केट में लाखों रुपये की संविदाएँ भी की हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि पोशाक के पीछे छुपा व्यक्ति आयुर्वेदिक दवाओं के व्यापार में सक्रिय झोला छाप डॉक्टरों को संरक्षण दे रहा है, जबकि राज्य में उचित चिकित्सा शिक्षा प्रणाली का कोई पालन नहीं हो रहा।

भट्टी ने सरकार से कुछ महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं, जैसे कि संजीव गोयल पर इतनी मेहरबानी क्यों हो रही है, जबकि वे सेवानिवृत्त हो चुके हैं? क्या पंजाब में कोई और योग्य व्यक्ति नहीं है जो इन संस्थानों का संचालन कर सके? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति के विरुद्ध नियम संजीव गोयल पर लागू नहीं होता?

इस प्रकरण ने न केवल पंजाब की आयुर्वेदिक शिक्षा प्रणाली को सवालों के घेरे में ला दिया है बल्कि यह इस बात की भी स्थायी पुष्टि करता है कि सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता कितनी अहम है। यदि इस प्रकार की अनियमितताएँ रुकी नहीं, तो इससे राज्य की चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य प्रणाली पर व्यापक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

आने वाले समय में देखना होगा कि इस मुद्दे पर सरकार क्या कदम उठाती है और क्या संजीव गोयल के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाएगी, जिससे पंजाब की शिक्षा प्रणाली में सुधार हो सके।

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