श्रीराम कथा की अमृतमयी धारा में डूबे श्रद्धालु, भजनों और सत्संग से हुए भाव-विभोर

कथा भगवान श्री राम जी की

 

चंडीगढ़, 6 मार्च 2026: भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर वातावरण के बीच महिला सुंदरकांड सभा (रजि.), चंडीगढ़ द्वारा सेक्टर-40-बी स्थित श्री हनुमंत धाम में आयोजित भव्य श्रीराम कथा श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आनंद का केंद्र बनी हुई है। पूरा वातावरण श्रीराम के जयकारों और भजनों से गूंज रहा है।

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान श्रीराम की भव्य आरती से हुई। इस अवसर पर सभा की प्रधान नीना तिवाड़ी, सदस्य पाल शर्मा, उषा सिंगला, कुमुद, गायत्री, अलका जोशी, सरला, दीप्ति, सुदर्शन शर्मा, सुनीता आनंद, राज कालिया, कमलेश, कंचन, बबली, उर्मिल सहित अन्य महिलाएं उपस्थित रहीं।

आरती के पश्चात कथा व्यास श्री हरि जी महाराज ने श्रीराम कथा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए भक्तों को भक्ति और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि श्रीराम की कथा सुनने और सुनाने से मनुष्य के पाप धुलते हैं, क्योंकि यह कथा व्यक्ति के भीतर श्रद्धा, मर्यादा, करुणा और सत्य के मूल्यों को जागृत करती है। जब मनुष्य भगवान के आदर्शों को समझता और उन्हें अपने जीवन में अपनाता है, तब उसका जीवन पवित्र और सार्थक बन जाता है।

कथा के दौरान श्री हरि जी महाराज ने मधुर भजनों की प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। “पायोजी मैंने राम रतन धन पायो”, “नहीं चाहिए दिल दुखा जा किसी का”, “सीता राम जी की प्यारी राजधानी लागे”, “मानुष जन्म अनमोल रे माही”, “जय जय राम कथा जय जय”, “शंकर तेरी जटा में बहती है गंगा”, “संतन के संग लाग रे तेरी” और “तेरी मेरे उठे विरह के पीर” जैसे भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। पूरा परिसर भक्ति रस में डूबा दिखाई दिया।

कथा व्यास ने सती चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए सती द्वारा भगवान श्री राम की परीक्षा लेने और उसके पश्चात उनके आत्मदाह की कथा का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया की अहंकार और संशय मनुष्य को भ्रम की ओर ले जाते हैं, जबकि आस्था और भक्ति उसे सत्य और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करती है।

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