- सीनियर डिप्टी मेयर जसबीर सिंह बंटी का बड़ा आरोप
- सीबीआई व होम सेक्रेटरी को पत्र भेजकर खुद को जांच से अलग रखने की मांग की
चंडीगढ़:–नगर निगम चंडीगढ़ में मनीमाजरा के 7.7 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को लेकर राजनीतिक तूफ़ान थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस प्रोजेक्ट पर भाजपा चंडीगढ़ के उपाध्यक्ष दविंदर सिंह बबला और नगर निगम के सीनियर डिप्टी मेयर जसबीर सिंह बंटी के बीच सीधा टकराव सामने आ गया है।
यहाँ भाजपा नेता दविंदर सिंह बबला का कहना है कि बंटी ने पहले प्रोजेक्ट का समर्थन किया था और अब विरोध कर रहे हैं, वहीं जसबीर सिंह बंटी ने इसे “सफेद झूठ” बताते हुए खारिज कर दिया है।
351वीं हाउस मीटिंग में क्या हुआ था?
जसबीर सिंह बंटी ने साफ किया कि नगर निगम की 351वीं हाउस मीटिंग में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट पर कोई चर्चा नहीं हुई थी। उस बैठक में सिर्फ एक सप्लीमेंट्री एजेंडा लाया गया था, जिसमें कहा गया था कि जिन किसानों की जमीन प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित की गई है, उन्हें कोटे का लाभ दिया जाएगा। बंटी ने कहा कि उन्होंने इस एजेंडे का समर्थन किया था क्योंकि यह किसानों के हित में था। लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि उन्होंने पूरे रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को समर्थन दिया।
352वीं हाउस मीटिंग में तीखा विरोध:-
बंटी ने बताया कि जब यह प्रोजेक्ट 352वीं नगर निगम हाउस मीटिंग में पेश किया गया, तब उन्होंने कड़े शब्दों में इसका विरोध किया था।
उनका कहना है कि उसी दौरान उन्हें हाउस से बाहर निकाल दिया गया और बाद में यह प्रोजेक्ट पास कर दिया गया।
बंटी का पलटवार — भाजपा उपाध्यक्ष पर सवाल
सीनियर डिप्टी मेयर जसबीर सिंह बंटी ने भाजपा उपाध्यक्ष दविंदर सिंह बबला के आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि बबला का इस मुद्दे पर बोलने का कोई औपचारिक अधिकार नहीं है। दविंदर सिंह बबला निगम का हिस्सा नही है, वो शायद इस मुगालते में है कि उनकी पत्नी नही, वो ही मेयर हैं।
बंटी ने सवाल उठाया कि आखिर नगर निगम की मेयर हरप्रीत कौर बबला, जो इस प्रोजेक्ट को हाउस में लेकर आई थीं, अब तक इस मामले पर चुप क्यों हैं। उन्होंने कहा कि मेयर को सार्वजनिक तौर पर अपना स्पष्टीकरण देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेयर को अगर लगता है कि वो इतनी सक्षम हैं तो निगम बैठक बुला कर इस मुद्दे पर पुनः से चर्चा करवाएं। क्यों मार्शल बुला कर विपक्षी पार्षदों को बाहर कर दिया जाता है और बिना चर्चा के एजेंडे को पास कर दिया जाता है। क्यों वो विपक्ष के सवालों से बचती फिर रही हैं।
