श्री दिगम्बर जैन मंदिर, सेक्टर 27-बी, चंडीगढ़ में चल रहे दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत आज नौवें दिन को “उत्तम आकिंचन धर्म” के रूप में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया।
उत्तम आकिंचन धर्म का महत्व
आकिंचन का अर्थ है – किसी भी प्रकार की वस्तु, वैभव या संपत्ति के प्रति आसक्ति न रखना।
यह धर्म सिखाता है कि सच्चा सुख भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि आत्मा की पवित्रता और निर्लिप्तता में है।
मोह और लोभ का त्याग कर मनुष्य वास्तविक वैराग्य और मोक्ष की ओर अग्रसर होता है।
भगवान महावीर ने कहा है –
“ संसार में सबसे बड़ी संपत्ति वैराग्य है।”
सुबह 7 बजे कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान महावीर के अभिषेक एवं शांतिधारा से हुआ। आज का प्रथम अभिषेक कैप्टेन J. K. Jain परिवार द्वारा संपन्न किया गया।प्रथम शांतिधारा – अदिति जैन के (जन्मदिन)के शुभ अवसर पर,श्रीमती कमल जैन,करुणा जैन, तुल्लिका जैन आदर्श जैन सेक्टर 8 चंडीगढ़ द्वारा की गयी। दूसरी शांतिधारा –इन्दरमल जैन, राजाबदुर सिंह जैन परिवार द्वारा की गयी।
इसके उपरांत ब्रह्मचारिणी लाभ्धि दीदी (हिमानी दीदी) के मार्गदर्शन में दशलक्षण विधान का आयोजन हुआ। आज के विधान के सोधरमेंन्द्र रजनीश जैन (ढकोली), यज्ञनायक संत कुमार जैन अशोक जैन हैल्लो माजरा तथा कुबेर इंद्र प्रमोद जैन (सेक्टर 2०), ईशान इंद्र सुभाष जैन ( सेक्टर 3०) रहे। विधान प्रातः 11 बजे पूर्ण हुआ, जिसके पश्चात सभी श्रद्धालुओं ने सात्विक भोजन ग्रहण किया।
सांयकाल 6:30 बजे महाआरती के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। तत्पश्चात लाभ्धि दीदी ने उत्तम आकिंचन धर्म की महत्ता पर प्रवचन दिया। इसके उपरांत धार्मिक क्रिकेट नाम की प्रतियोगिता एवं भक्ति संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें युवा एवं महिलाएँ विशेष रूप से सम्मिलित हुईं।
यह जानकारी श्री दिगम्बर जैन सोसायटी, चंडीगढ़ के अध्यक्ष श्री धर्म बहादुर जैन द्वारा दी गयी।
