चंडीगढ़ में जैविक कचरे से कम्पोस्ट बनाने पर एक व्याख्यान एवं कार्यशाला आयोजित

पर्यावरण सोसाइटी ऑफ इंडिया, चंडीगढ़ के स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आज वेस्टर्न कमांड मुख्यालय, चंडीगढ़ में जैविक कचरे से कम्पोस्ट बनाने पर एक व्याख्यान एवं कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में भारतीय सेना के 150 से अधिक अधिकारी एवं जवानों ने भाग लिया।
भारतीय सेना के अधिकारियों ने प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति पर्यावरण सोसाइटी ऑफ इंडिया की 50 वर्षों की यात्रा की सराहना की। उन्होंने सोसाइटी के प्रतिनिधियों—इंजीनियर हेम राज सतीजा (उपाध्यक्ष), श्री एन. के. झिंगन (सचिव) और इंजीनियर अशोक बंसल—का स्वागत किया, जिन्होंने प्रतिभागियों को वेस्टर्न कमांड क्षेत्र, उसके आस-पास और अपने घरों में कम्पोस्ट बनाने संबंधी जानकारी प्रदान की।
डॉ. एन. के. झिंगन ने सोसाइटी की गतिविधियों से अवगत करवाते हुए प्रतिभागियों को राष्ट्र एवं प्रकृति दोनों की रक्षा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में बताया। उन्होंने पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने, प्लास्टिक का उपयोग न करने, तथा घरेलू एवं किचन-गार्डन कचरे का पृथक्करण करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है और इसके प्रति दूसरों को भी जागरूक करना चाहिए। उन्होंने प्रतिभागियों को खरीदारी करते समय कपड़े के थैले साथ रखने की सलाह दी, क्योंकि प्लास्टिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक एवं पर्यावरण के लिए अत्यंत प्रदूषक है।
इंजि. हेम राज सतीजा ने घर तथा आसपास के क्षेत्रों में किचन और घरेलू कचरे को सरल तरीकों से कम्पोस्ट में परिवर्तित करने के व्यावहारिक उपायों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने यह भी बताया कि वेस्टर्न कमांड में सामुदायिक खाद गड्ढे कम लागत और कम श्रम से बनाए जा सकते हैं, जिससे क्षेत्र को कचरा-मुक्त बनाने में सहायता मिलेगी।
कार्यशाला के अंत में सभी जवानों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई गई।
पर्यावरण सोसाइटी ऑफ इंडिया की टीम ने चन्दन वाटिका का भी दौरा किया, जहां सोसाइटी द्वारा 1990 के दशक में चन्दन के पौधे लगाए गए थे—ये पौधे वायुसेना द्वारा मैसूर से एयरलिफ्ट कर लाए गए थे। टीम ने यह देखकर प्रसन्नता व्यक्त की कि अनेक चुनौतियों के बावजूद ये पेड़ आज भी वेस्टर्न कमांड गोल्फ ग्राउंड में सुरक्षित एवं हरे-भरे हैं।
श्री एन. के. झिंगन के अनुसार, वेस्टर्न कमांड के अन्य क्षेत्रों में भी पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रमों के अंतर्गत इसी प्रकार की कार्यशालाएँ निकट भविष्य में आयोजित की जाएँगी।

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