श्री दिगम्बर जैन मंदिर, सेक्टर 27-बी, चंडीगढ़ में दशलक्षण महापर्व के छठे दिन का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। आज का दिन उत्तम संयम धर्म को समर्पित रहा।

2-9-2025: श्री दिगम्बर जैन मंदिर, सेक्टर 27-बी, चंडीगढ़ में दशलक्षण महापर्व के छठे दिन का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। आज का दिन उत्तम संयम धर्म को समर्पित रहा।
प्रातःकाल कार्यक्रम का शुभारंभ मंगल अभिषेक एवं पूजन से हुआ। आज के अभिषेक का सौभग्य अलोक जैन, रोपड़ को प्राप्त हुआ , द्वितीय शांति धारा राजीव जैन सेक्टर 45,,योगेश जैन एवं जैन युवा ग्रुप ने की।तत्पश्चात दशलक्षण विधान हुआ जिसमें सोधरमेंद्र प्रमोद जैन सेक्टर 20, यज्ञनायक अशोक जैन हैल्लो माजरा और कुबेर इंद्र अमित जैन सेक्टर 29 रहे. विधान का समापन प्रातः 11 बजे हुआ, जिसके पश्चात सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से सात्विक भोजन ग्रहण किया।
उत्तम संयम धर्म का महत्व
ब्रह्मचारिणी लब्धि दीदी ने अपने प्रवचन में बताया कि संयम का अर्थ है – इन्द्रियों और मन को नियंत्रण में रखना। भोग-विलास, आसक्ति और वासनाओं से दूर रहकर आत्मा की ओर अग्रसर होना ही वास्तविक संयम है। संयम मनुष्य को दृढ़, शांति-प्रिय और आत्मिक उत्थान की ओर ले जाता है। इन्द्रियों का निग्रह ही मोक्षमार्ग की आधारशिला है।
संध्याकालीन कार्यक्रम का आरंभ 3:30 बजे धुप खेवन से हुआ। आज का दिन जैन धर्म में धुप दशमी के रूप में मनाया जाता है।
धूप दशमी जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व है, जो भाद्रपद शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इसे धूप दशमी या अनंत दशमी भी कहा जाता है। यह पर्व विशेष रूप से भगवान वासुपूज्य स्वामी (पहले तीर्थंकर, जिन्होंने शरीर त्याग किया) की स्मृति और उनके निर्वाण कल्याणक से जुड़ा हुआ है।
धूप अर्पण की परंपरा – इस दिन जैन समाज मंदिरों में भगवान की प्रतिमा पर विशेष प्रकार की धूप (अगर, धूप, गंध, सुगंधित द्रव्य) अर्पित करता है। इसका प्रतीकात्मक अर्थ है कि जैसे धूप जलकर सुगंध फैलाती है, वैसे ही हमें अपने जीवन में त्याग और तपस्या से आत्मा को शुद्ध करना चाहिए।
अहिंसा और संयम का संदेश – धूप दशमी का मुख्य उद्देश्य आत्मा को पवित्र बनाना और सांसारिक आसक्ति से दूर होकर संयमित जीवन जीने की प्रेरणा देना है।
पूर्वकृत पुण्य स्मरण – यह पर्व हमें स्मरण कराता है कि आत्मा का उत्थान केवल तप, संयम और धर्ममार्ग से ही संभव है।
अनुष्ठान और विधान – इस दिन श्रद्धालु लोग पूजा, अभिषेक, धूप–दीप अर्पण, स्वाध्याय, सामूहिक आरती, और व्रत-उपवास करते हैं।
धर्म लाभ – माना जाता है कि इस दिन किया गया तप, दान और व्रत असीम पुण्य फलदायी होता है और आत्मा को मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर करता है।
सांय 6.30 बजे महा आरती की गयी । इसके बाद श्रावकों को उत्तम संयम धर्म की गहन व्याख्या सुनाई गई और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं ने भजन संध्या का आनंद लिया जिसमे समाज के विभिन आयु वर्ग के लोगों ने भक्ति गीत एवं धार्मिक प्रस्तुतियाँ दीं।
त्रिसिटी से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और धर्म लाभ प्राप्त किया। अध्यक्ष श्री धर्म बहादुर जैन ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए पुरे समाज का धन्यवाद किया एवं सबको देश लक्षण धर्म अपने जीवन में अपनाने का आवाहन किया। इस अवसर पर कार्यकारिणी की और से आदर्श जैन, संत कुमार जैन , राज बहादुर सिंह जैन , नीरज जैन शरद जैन, इन्दरमल जैन , एवं रमेश जैन उपस्थित रहे।

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