“उत्तम मार्दव दिवस” बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया

चंडीगढ़, 29 अगस्त – श्री दिगम्बर जैन मंदिर, सेक्टर 27-बी, चंडीगढ़ में दशलक्षण पर्व के अंतर्गत आज दूसरे दिन “उत्तम मार्दव दिवस” बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया।
जैन धर्म के दशलक्षण महापर्व का दूसरा गुण उत्तम मार्दव है। मार्दव का अर्थ है नम्रता और अहंकार का त्याग।अहंकार सभी पापों और अशुभ कर्मों की जड़ है। जब मनुष्य धन, पद, कुल, सौंदर्य या विद्या का घमंड छोड़कर विनम्र बनता है, तभी वह सच्चे धर्म का पालन करता है।उत्तम मार्दव आत्मा को पवित्र बनाता है और मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करता है।
उत्तम मार्दव के बारे में अध्यक्ष धमबहादुर जैन ने बताया की इसका व्यवहारिक जीवन में भी बड़ा महत्व है -नम्रता से बड़ा से बड़ा कार्य सहज हो जाता है-नम्र व्यक्ति सबका प्रिय होता है- नम्रता से समाज में शांति, प्रेम और सहयोग बढ़ता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रथम अभिषेक से हुआ, जिसे विजय जैन(सेक्टर 5०) ने संपन्न किया। प्रथम शांतिधारा का सौभग्य इन्दरमल जैन एवं चंदा जैन को व् द्वितीय शांतिधारा का सौभग्य नवरत्तन जैन, विनोद जैन को प्राप्त हुआ। अभिषेक के पश्चात दशलक्षण विधान का आयोजन ब्रहमचारिणी लब्धि दीदी (हिमानी दीदी) के पावन सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।
आज के विधान में –सोधर्मेन्द्र – इंदर मल जैन,यज्ञ नायक – अशोक जैन,कुबेर इन्द्र – आदित्य जैन(होशंगाबाद) की भूमिका रही। आज के विधान में उपयोग की गयी सामग्री अनिल जैन, मधु जैन परिवार ने प्रयोजित की। विधान का समापन प्रातः 11 बजे हुआ, जिसके उपरांत सभी श्रद्धालुओं ने सात्विक भोजन ग्रहण किया। आज के भोजन के पुण्यार्जक संत कुमार जैन, नीलम जैन रहे।
शाम का कार्यक्रम सायं 6:30 बजे महाआरती के साथ प्रारंभ हुआ। इसके बाद श्रद्धालुओं को लब्धि दीदी ने “छह ढाला” जैन ग्रंथ के विषय में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। तत्पश्चात मनोरंजक एवं ज्ञानवर्धक धार्मिक अंताक्षरी का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ों और बच्चों सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
आज के कार्यक्रमों में चंडीगढ़ सहित ट्राय सिटी से सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्मलाभ अर्जित किया।

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