चंडीगढ़, 6 अक्टूबर: सेक्टर-45 स्थित सब्जी मंडी ग्राउंड में श्री राधावल्लभ भागवत सेवा ट्रस्ट, राधावल्लभ महिला मंडल एवं आरबी युवा शक्ति फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास श्रद्धेय श्री विजय शास्त्री जी ने सती प्रसंग, जड़भरत चरित्र और भक्त प्रह्लाद की कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन के गूढ़ सत्य से परिचित कराया।
माता सती के प्रसंग का वर्णन करते हुए शास्त्री जी ने कहा कि जब मन में संशय और अहंकार प्रवेश कर जाता है, तो व्यक्ति अपनों का विश्वास खो देता है। माता सती द्वारा प्रभु श्रीराम की परीक्षा लेने तथा पिता दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान न सह पाने के कारण देह त्यागने का प्रसंग सुन श्रद्धालु भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि सांसारिक संबंधों में सम्मान और विश्वास सबसे महत्वपूर्ण हैं।
जड़भरत चरित्र के माध्यम से उन्होंने समझाया कि हिरण के बच्चे के प्रति अत्यधिक मोह के कारण भरत जी को अगला जन्म हिरण के रूप में लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि संसार में रहते हुए जिम्मेदारियों का निर्वहन करें, लेकिन मोह को ईश्वर प्राप्ति के मार्ग में बाधा न बनने दें।
भक्त प्रह्लाद की अनन्य भक्ति का वर्णन करते हुए उन्होंने भगवान के प्रति अटूट विश्वास का संदेश दिया। कथा के दौरान जब उन्होंने “संतन के संग लाग रे, तेरी अच्छी बनेगी…” भजन सुनाया, तो पूरा पंडाल भक्ति भाव से सराबोर हो गया। “नजर में बसा लो नृसिंह भगवान को” और “मुरली धर छलिया मोहन” भजनों पर श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए।
कथा के विश्राम पर बांके बिहारी जी की महाआरती की गई और श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।
