3 व 4 अक्टूबर से साधना टीवी पर प्रस्तावित चर्चा, धर्म गुरुओं से धार्मिक ग्रंथों के प्रमाणों के आधार पर पक्ष रखने की अपील
चंडीगढ़, 1 अक्तूबर
आध्यात्मिक ज्ञान और धार्मिक ग्रंथों में वर्णित सिद्धांतों को लेकर विभिन्न धार्मिक विचारधाराओं के बीच संवाद को शास्त्र आधारित चर्चा का स्वरूप देने के उद्देश्य से संत रामपाल जी महाराज की ओर से विभिन्न धर्म गुरुओं को ज्ञान चर्चा के लिए दिए गए निमंत्रण का चंडीगढ़ की संगत ने स्वागत किया है। चंडीगढ़ में संत रामपाल जी महाराज के सेवादारों ने मीडिया से बातचीत करते हुए इस संबंध में जानकारी साझा की।
सेवादारों ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज की ओर से विभिन्न धर्मों से जुड़े धर्म गुरुओं को ज्ञान चर्चा में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है। उनके अनुसार इस चर्चा की शुरुआत 3 व 4 अक्टूबर 2026 से प्रत्येक शनिवार और रविवार शाम 7:30 बजे से 9:30 बजे तक साधना टीवी पर प्रस्तावित है। बताया गया कि चर्चा को प्रत्येक सप्ताह जारी रखने का प्रस्ताव है, जब तक संबंधित विषयों पर विचार-विमर्श पूरा नहीं हो जाता।
सेवादारों ने कहा कि धार्मिक विषयों पर व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप अथवा आपसी विवाद के बजाय यदि विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में उपलब्ध प्रमाणों और संदर्भों के आधार पर विचार-विमर्श किया जाए तो इससे आम लोगों को अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं और सिद्धांतों को समझने का अवसर मिल सकता है। इसी उद्देश्य से संत रामपाल जी महाराज की ओर से धर्म गुरुओं को अपने-अपने धार्मिक ग्रंथों के प्रमाणों के आधार पर चर्चा में अपना पक्ष रखने का आह्वान किया गया है।
सेवादारों के अनुसार संत रामपाल जी महाराज का कहना है कि जिस प्रकार न्यायालय में किसी मामले पर दोनों पक्ष निर्धारित कानून और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर अपनी दलील प्रस्तुत करते हैं, उसी प्रकार धार्मिक विषयों पर होने वाली चर्चा में भी प्रमाणिक धार्मिक ग्रंथों को आधार बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि संत रामपाल जी महाराज की ओर से अपना पक्ष पवित्र सूक्ष्म वेद के साथ चारों वेद—ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद—तथा श्रीमद्भगवद्गीता, रामचरितमानस, वाल्मीकि रामायण, महाभारत और श्रीमद्भागवत सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों के संदर्भों के आधार पर रखने की बात कही गई है। साथ ही अन्य धर्म गुरुओं से भी अपने-अपने धार्मिक ग्रंथों के प्रमाणों के आधार पर अपने विचार रखने की अपील की गई है।
चंडीगढ़ में मीडिया से बातचीत के दौरान सेवादारों ने बताया कि इस ज्ञान चर्चा के लिए विभिन्न धर्मों से जुड़े धर्म गुरुओं को आमंत्रित किया गया है। विशेष रूप से सनातन धर्म से जुड़े धर्म गुरुओं से भी धार्मिक ग्रंथों के प्रमाणों के आधार पर अपने विचार रखने का आह्वान किया गया है।
सेवादारों के अनुसार यदि कोई धर्म गुरु टेलीविजन चैनल पर सीधे चर्चा में शामिल होने में सक्षम नहीं है तो वह यूट्यूब जैसे डिजिटल माध्यमों के जरिए भी अपना पक्ष रख सकता है। ऐसे तर्कों और विचारों को भी चर्चा के संदर्भ में शामिल किए जाने की बात कही गई है।
सेवादारों ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज की ओर से यह भी कहा गया है कि यदि उनके द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे किसी ज्ञान अथवा तर्क को धार्मिक ग्रंथों के प्रमाणों के आधार पर गलत सिद्ध किया जाता है तो वह 50 लाख रुपये के इनाम की घोषणा करते हैं। उनके अनुसार इस संबंध में सामने वाले पक्ष से किसी प्रकार की राशि नहीं ली जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि संत रामपाल जी महाराज की ओर से देवी-देवताओं के अपमान अथवा उनकी भक्ति का विरोध करने जैसे आरोपों के संदर्भ में भी धार्मिक ग्रंथों के प्रमाणों के आधार पर चर्चा करने की बात कही गई है। उनका कहना है कि वह अपने सत्संगों में धार्मिक ग्रंथों के संदर्भों के माध्यम से अपनी बात रखते आ रहे हैं और यदि उनके द्वारा कही गई कोई बात शास्त्रों के विपरीत प्रमाणित होती है तो उसे स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।
चंडीगढ़ की संगत से जुड़े लोगों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि धार्मिक विषयों पर होने वाली चर्चा का उद्देश्य किसी व्यक्ति अथवा धर्म को नीचा दिखाना नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में दर्ज विचारों, सिद्धांतों और प्रमाणों को लोगों के सामने रखने से आम व्यक्ति को स्वयं विषय को समझने और अपने स्तर पर विचार करने का अवसर मिल सकता है।
संगत से जुड़े लोगों के अनुसार यदि विभिन्न धर्मों के ज्ञानी और धर्म गुरु अपने-अपने पवित्र ग्रंथों के प्रमाणों के साथ अपने विचार प्रस्तुत करते हैं तो इससे आध्यात्मिक विषयों पर व्यापक संवाद का अवसर मिल सकता है। उनका कहना है कि इस प्रकार की चर्चा व्यक्तिगत विवाद के बजाय धार्मिक ग्रंथों में उपलब्ध प्रमाणों और संदर्भों पर केंद्रित रहनी चाहिए।
सेवादारों ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज की ओर से इस पहल को व्यक्तिगत बहस के बजाय शास्त्र आधारित ज्ञान चर्चा के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें एक-दूसरे को नीचा दिखाने के बजाय धार्मिक ग्रंथों में दर्ज प्रमाणों और संदर्भों को चर्चा का आधार बनाने पर जोर दिया गया है।
3 व 4 अक्टूबर से साधना टीवी पर प्रस्तावित इस ज्ञान चर्चा को लेकर चंडीगढ़ की संगत में भी उत्सुकता देखी जा रही है। सेवादारों का कहना है कि विभिन्न धार्मिक विचारों को उनके संबंधित ग्रंथों के प्रमाणों के आधार पर सामने रखने से आध्यात्मिक विषयों पर तथ्य एवं शास्त्र आधारित संवाद का अवसर मिल सकता है।
