नई दिल्ली।
काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) के विशेषज्ञों ने केंद्रीय बजट में पशुपालन, भारी उद्योगों के डीकार्बोनाइजेशन और शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रावधानों को महत्वपूर्ण बताया है, साथ ही कुछ बुनियादी खामियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है।
पशुपालन: स्वास्थ्य के साथ पोषण पर भी ज़ोर जरूरी
सीईईडब्ल्यू के फेलो एवं डायरेक्टर (ग्रीन इकोनॉमी एंड इम्पैक्ट इनोवेशन) अभिषेक जैन ने कहा कि बजट में 20,000 पशु चिकित्सा पेशेवरों को जोड़ने और ब्रीडिंग सुविधाओं के विस्तार पर दिया गया जोर सराहनीय है। इससे पशु स्वास्थ्य और देश के पशुधन की आनुवंशिक प्रोफाइल को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि पशु स्वास्थ्य का अहम आधार पशु पोषण है। सीईईडब्ल्यू के राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में हर चार में से तीन पशुपालक चारे की कमी से जूझ रहे हैं। इसके बावजूद साइलेज निर्माण और आहार संतुलन जैसे उपायों की जागरूकता और उपयोग क्रमशः केवल 20 प्रतिशत और 5 प्रतिशत तक सीमित है।
आर्थिक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पशुधन की संख्या में वृद्धि चारे के विस्तार से अधिक रही है, जिससे हरे चारे की उपलब्धता में 11 से 32 प्रतिशत तक की कमी आई है। पोषण की इन बुनियादी कमियों को दूर किए बिना स्वास्थ्य और ब्रीडिंग से जुड़े प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाएंगे।
भारी उद्योगों के लिए CCUS अहम
सीईईडब्ल्यू के फेलो हेमंत मल्या ने कहा कि भारी उद्योगों के कार्बन उत्सर्जन को घटाने के लिए 20,000 करोड़ रुपये का आवंटन और कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (CCUS) तकनीक बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। उन्होंने कहा कि इन उद्योगों में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन इतना अधिक है कि ऊर्जा दक्षता, वैकल्पिक ईंधन और अक्षय ऊर्जा जैसे विकल्पों से इसे पूरी तरह कम नहीं किया जा सकता।
उन्होंने बताया कि भारत के पास भूमिगत खारी जलधाराओं और बेसाल्ट खनिजों में 350 गीगाटन से अधिक की भंडारण क्षमता मौजूद है। साथ ही, नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का प्रभावी क्रियान्वयन और राज्यों के स्तर पर ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए मिलने वाला 61 बिलियन डॉलर से अधिक का प्रोत्साहन, CCU तकनीकों की लागत घटाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
टियर-2 और टियर-3 शहरों को मिलेगा बल
सीईईडब्ल्यू के फेलो डॉ. विश्वास चितले ने कहा कि 12.2 लाख करोड़ रुपये के बढ़े हुए आवंटन के साथ यह बजट टियर-2 और टियर-3 शहरों के बुनियादी ढांचे को नई मजबूती देता है। इससे ऐसे जलवायु-अनुकूल और आर्थिक रूप से सक्षम शहरों के निर्माण में सहायता मिलेगी।
उन्होंने बताया कि 16वें वित्त आयोग ने 2026-31 के लिए आपदा जोखिम प्रबंधन कोष (DRMF) हेतु 2.04 लाख करोड़ रुपये की सिफारिश की है, जो 15वें वित्त आयोग की तुलना में 28 प्रतिशत अधिक है।
सीईईडब्ल्यू के शोध के अनुसार, भारत के 60 प्रतिशत जिलों में रहने वाली लगभग दो-तिहाई आबादी अत्यधिक गर्मी के जोखिम का सामना करती है। ऐसे में 16वें वित्त आयोग द्वारा हीटवेव और आकाशीय बिजली को राष्ट्रीय आपदाओं में शामिल करना, भारत की हीट-रेजिलिएंस क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
