चंडीगढ़ नगर निगम के महापौर, वरिष्ठ उप महापौर एवं उप महापौर के चुनाव हर वर्ष 1 जनवरी को ही हों: देवशाली

  • जनप्रतिनिधियों के कार्यकाल में कटौती का अधिकार किसी को नहीं: देवशाली

चंडीगढ़, दिनांक 24 दिसंबर :

चंडीगढ़ नगर निगम के पूर्व पार्षद शक्ति प्रकाश देवशाली ने चंडीगढ़ के माननीय प्रशासक महोदय को एक विस्तृत पत्र लिखकर मांग की है कि नगर निगम के महापौर, वरिष्ठ उप महापौर एवं उप महापौर के चुनाव प्रत्येक वर्ष 1 जनवरी को ही सुनिश्चित रूप से कराए जाएं, ताकि निर्वाचित पदाधिकारियों को संविधान और कानून की मंशा के अनुरूप पूर्ण एक वर्ष का प्रभावी कार्यकाल प्राप्त हो सके।

देवशाली ने अपने पत्र में कहा है कि वर्तमान प्रथा के तहत अक्सर इन चुनावों की तिथि जनवरी माह के उत्तरार्द्ध या अंत में तय की जाती है, जिसके चलते महापौर एवं अन्य शीर्ष पदाधिकारियों को व्यावहारिक रूप से एक वर्ष से कम अवधि के लिए ही पद पर कार्य करने का अवसर मिलता है, जो न केवल निगम प्रशासन की स्थिरता को प्रभावित करता है, बल्कि दीर्घकालिक विकास योजनाओं के सुचारु क्रियान्वयन पर भी प्रतिकूल असर डालता है।

देवशाली ने पंजाब म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट, 1976 की धारा 38 तथा The Punjab Municipal Corporation Law (Extension to Chandigarh) Act, 1994 का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून की स्पष्ट मंशा यह है कि निगम की “प्रथम बैठक” में महापौर का चुनाव हो, ताकि उसे लगभग पूर्ण वार्षिक कार्यकाल मिल सके और वह बजट, नीतियों तथा विकास योजनाओं को सुसंगत ढंग से लागू कर सके।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कानून के अनुसार महापौर के चुनाव हेतु बैठक बुलाने की शक्ति अधिकृत प्राधिकारी (चंडीगढ़ के संदर्भ में डिप्टी कमिश्नर/प्रिस्क्राइब्ड अथॉरिटी) के पास है, जो तिथि निर्धारित करते हैं; इसलिए यह आवश्यक है कि यह बैठक वर्ष के प्रारम्भ में, विशेष रूप से 1 जनवरी या उसके निकटतम प्रारम्भिक कार्य दिवस पर ही आयोजित की जाए, तभी महापौर, वरिष्ठ उप महापौर एवं उप महापौर को वास्तविक अर्थों में पूरे वर्ष का कार्यकाल मिल पाएगा।

चंडीगढ़ नगर निगम के इतिहास का उल्लेख करते हुए देवशाली ने बताया कि निगम गठन के बाद प्रथम महापौर श्रीमती कमला शर्मा 23 दिसम्बर 1996 को निर्वाचित हुई थीं और उनके बाद चार महापौर लगातार 23 दिसम्बर को चुने गए। बाद में दूसरे निगम चुनावों के पश्चात् वर्ष 2002 से लेकर 2014 तक यह स्वस्थ परंपरा रही कि महापौर, वरिष्ठ उप महापौर एवं उप महापौर 1 जनवरी को चुने जाते रहे, जिससे उन्हें लगभग पूर्ण वर्ष का कार्यकाल मिलता रहा।

देवशाली के अनुसार वर्ष 2015 में पहली बार चुनाव 6 जनवरी को कराए गए और उसके बाद से चुनाव की तिथि अधिकृत अधिकारी के कार्यालय की सुविधा के अनुसार आगे खिसकती गई, जिसका सबसे अधिक नुकसान उस निर्वाचित नगर निगम के अंतिम वर्ष के महापौर, वरिष्ठ उप महापौर एवं उप महापौर को होता है, जबकि यह वर्ष सभी राजनीतिक दलों के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसके तुरंत बाद नई निगम के चुनाव होते हैं।

पूर्व पार्षद ने स्पष्ट कहा कि लोकतंत्र में निर्वाचित पार्षदों द्वारा चुने गए महापौर, वरिष्ठ उप महापौर एवं उप महापौर के कार्यकाल में कटौती का अधिकार किसी भी अधिकारी को नहीं है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि संविधान एवं विधि द्वारा निहित एक वर्ष का कार्यकाल सभी को समान रूप से मिले।

शक्ति प्रकाश देवशाली ने माननीय प्रशासक से करबद्ध अनुरोध किया है कि संबंधित प्राधिकरण (डिप्टी कमिश्नर/प्रिस्क्राइब्ड अथॉरिटी) को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं कि चंडीगढ़ नगर निगम के महापौर, वरिष्ठ उप महापौर एवं उप महापौर के चुनाव प्रत्येक वर्ष 1 जनवरी को ही, अथवा किसी अपरिहार्य स्थिति में 1 जनवरी के तुरंत निकटतम प्रारम्भिक कार्य दिवस पर करवाए जाएं, तथा इस बैठक को निगम की “प्रथम बैठक” मानते हुए समयबद्ध रूप से आयोजित किया जाए।

उन्होंने यह भी आग्रह किया कि आगामी वर्ष से नगर निगम के इन तीनों शीर्ष पदों पर निर्वाचित प्रतिनिधियों को पूर्ण एक वर्ष के बराबर प्रभावी कार्यकाल उपलब्ध कराया जाए, ताकि प्रशासनिक निरंतरता, जवाबदेही तथा जनहित में चल रही विकास परियोजनाओं की योजनाबद्ध गति बनी रहे और चंडीगढ़ नगर निगम एक अधिक सक्षम, पारदर्शी और सुशासित संस्था के रूप में कार्य कर सके।

देवशाली ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि प्रशासन स्तर पर समयबद्ध चुनाव व्यवस्था लागू की जाती है तो यह न केवल विधि की भावना के अनुरूप होगा, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा, पारदर्शिता एवं सुशासन को भी सुदृढ़ करेगा।

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