स्थान: श्री राधा वल्लभ धाम, सेक्टर-45, चंडीगढ़
कथावाचक: श्रद्धेय श्री विजय शास्त्री जी महाराज
समय: सायं 4 बजे से रात्रि 8 बजे तक
चंडीगढ़, 27 अक्तूबर
श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के चतुर्थ दिवस पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। पंडाल में भक्ति का ऐसा माहौल बना कि हर ओर “जय श्रीराम” और “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयकारे गूंज उठे।
कथा व्यास श्रद्धेय श्री विजय शास्त्री जी महाराज ने भावपूर्ण वाणी में पहले प्रह्लाद चरित्र और भगवान नरसिंह अवतार का वर्णन करते हुए बताया कि भक्त की रक्षा स्वयं भगवान करते हैं। उन्होंने कहा “भक्ति में जो अटल रहता है, उसके जीवन में कोई असंभव नहीं।”
इसके पश्चात् कथा का प्रवाह त्रेतायुग की ओर बढ़ा और श्री शास्त्री जी ने भगवान श्रीराम जन्म कथा का भाव-विभोर कर देने वाला वर्णन किया।
उन्होंने कहा “जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब प्रभु किसी न किसी रूप में अवतरित होकर धर्म की स्थापना करते हैं। श्रीराम का जन्म मर्यादा, सत्य और करुणा की मूर्ति के रूप में हुआ। “जय श्रीराम” के जयघोष से वातावरण गूंज उठा।
मां कौशल्या के गर्भ से प्रभु के अवतरण का प्रसंग सुनाते हुए कई श्रद्धालु भाव-विह्वल हो उठे।
इसके बाद कथा आगे बढ़ी और श्री शास्त्री जी ने द्वापर युग का आरंभ करते हुए भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का वर्णन किया।
मध्य में घनघोर वर्षा, जेल का द्वार खुलना, देवकी-वसुदेव की व्याकुलता और अंततः नंदलाल के प्राकट्य का अद्भुत चित्रण हुआ।
ज्यों ही शास्त्री जी ने कहा “निशा के अंधकार में दिव्य प्रकाश फैला और वासुदेव के सम्मुख स्वयं श्रीकृष्ण प्रकट हुए ,त्यो ही पूरा पंडाल जयघोष से झूम उठा
“नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की!”
बाल गोपाल का झूला सजाया गया और भक्तों ने झूम-झूमकर नृत्य किया। कथा स्थल माखन-मिश्री वितरण और भजन संध्या से गूंज उठा।
दिन का समापन आरती और भंडारे के साथ हुआ।
आज के मुख्य अतिथि के तौर पर
डॉ बाबूलाल अरोड़ा और सेक्टर 23 मुनि मंदिर से संत जी पधारे..
