राजस्थान से बाहर की इकाइयों द्वारा ‘बीकानेरी भुजिया’ जीआई टैग के दुरुपयोग पर अदालत ने रोक लगाई

सोनीपत (अमरपाल नूरपुरी) – माननीय जिला न्यायालय, पटियाला हाउस, नई दिल्ली ने बीकानेर के एक प्रमुख निर्माता, बीकानेर भुजिया उद्योग संघ को “बीकानेरी भुजिया” के जियोग्राफिकल इन्डिकेशन (जीआई) टैग की रक्षा के लिए अपनी लंबी कानूनी लड़ाई में राहत प्रदान की है। संघ ने कानपुर (उत्तर प्रदेश) की एक इकाईऔर सोनीपत (हरियाणा) की तीन इकाइयों सहित स्नैक और नमकीन उत्पादकों के खिलाफ बीकानेर से कोई संबंधन होने के बावजूद”बीकानेरी भुजिया” नाम का अवैध रूप से उपयोग करने के लिए मुकदमा दायर किया था। संघ का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता ने तर्क दिया कि जीआई चिह्न वस्तुओं का जीआई ( रजिस्ट्रेशन एण्ड प्रोटेक्शन ) अधिनियम,1999 के तहत पंजीकृत है,और केवल बीकानेर में स्थित और संघ द्वाराअधिकृत इकाइयाँ ही इस शब्द का उपयोग कर सकती हैं।कानपुर और सोनीपत इकाइयों द्वारा “बीकानेरी भुजिया” के इस्तेमाल ने उपभोक्ताओं को यह विश्वास दिलाकर गुमराह किया कि उनके उत्पाद बीकानेर से आए हैं,जबकि उन्होंने न तो जीआई टैग का इस्तेमाल करने की अनुमति ली थी और न ही अधिकार। साक्ष्यों की समीक्षा के बाद, न्यायालय ने सभी चार इकाइयोंको “बीकानेरी भुजिया” नाम से उत्पादों के निर्माण, बिक्री, प्रदर्शन या निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया, जिससे उत्पाद की प्रामाणिकता और बीकानेर स्थित वास्तविक निर्माताओं के हितों की रक्षा हुई। आदेश को लागू करने के लिए,न्यायालय ने स्थानीय आयुक्तों की नियुक्ति की, जिन्होंने 18 जुलाई 2025 को कानपुर इकाई और 25-26 अगस्त 2025 और 5 सितंबर 2025 को सोनीपत इकाइयों पर छापा मारा और जीआई नाम वाले भारी मात्रा में सामान और पैकेजिंग सामग्री जब्त की। आरोपी कंपनियों के जवाब का इंतजार है।

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